जींद। कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से सोमवार को विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत गांव अनूपगढ़, किनाना और बराड़ खेड़ा में किसान जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। डॉ. पी बरनवाल ने बताया कि खेती के साथ-साथ पशुपालन भी आवश्यक है। स्वच्छ दूध के लिए पशु का स्वस्थ होना जरूरी है।
स्वस्थ पशु के लिए संतुलित आहार की आवश्यकता है। दूध में लगभग 87 प्रतिशत पानी होता है, जिससे दूध जल्दी खराब हो जाता है। डॉ. पवन और डॉ. प्रीति ने शामलो कलां, शामलो खुर्द और गोसाई खेड़ा में किसानों से संवाद किया।
उन्होंने कहा कि दूध प्रसंस्करण द्वारा विभिन्न डेयरी उत्पादों पनीर, छेना और दही को बनाकर इसकी रखरखाव की अवधि को बढ़ा सकते हैं। डॉ. मगन सिंह ने अच्छे चारे के लिए हरियाणा के लिए संस्तुति की गई ज्वार की किस्मों को उगाने का आह्वान किया।
उन्होंने किसानों को बताया कि बीज उपचार जरूर करें। ज्वार के अतिरिक्त अन्य चारे की फसलें जैसे मक्का, मकचरी, शुगर ग्रेज को भी उगाया सकते है। डॉ. संदीप सिहाग ने धान से संबंधित जानकारी किसानों को दी। अधिक उपज और रोग प्रतिरोधी बासमती धान के बीज जैसे 1847, 1885 व 1886 जानकारी दी। धान की सीधी बिजाई के बारे में भी उन्होंने जानकारी दी।
धान में पोषण प्रबंधन और खरपतवार प्रबंधन के बारे में जानकारी दी। डॉ. धीरज पंघाल ने मिट्टी की जांच व तरीकों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि मिट्टी की जांच से भूमि के पौष्टिक तत्वों की रूपरेखा समझी जा सकती है, जिसके मद्देनजर रखकर किसान फसलों का चयन कर सकते हैं।
मौसम वैज्ञानिक डॉ. राजेश ने कलौदा कलां, कलौदा खुर्द, खरड़वाल में वर्षा के दिनों में किसानों द्वारा बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी दी। डॉ. सुरेंद्र मित्तल ने औषधीय व सुगंधित पौधों की रोपाई, खाद व उर्वरक की मात्रा, सिंचाई, निराई व पौध संरक्षण के बारे में बताया।