जींद। शहर की आउटर कॉलोनियों में वर्षों से चली आ रही सीवरेज समस्या अब जल्द ही खत्म होगी। जनस्वास्थ्य विभाग की परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद 32 कालोनियों में 73 किलोमीटर लंबी सीवरेज लाइन बिछाई जाएगी।
साथ ही हांसी रोड पर 10 एमएलडी क्षमता का आधुनिक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) भी स्थापित किया जाएगा। इन दोनों कार्यों पर करीब 41 करोड़ रुपये खर्च होंगे। मुख्यालय से हरी झंडी मिलने के बाद विभाग परियोजना को धरातल पर उतारने की तैयारी में जुट गया है।
अब तक इन आउटर कालोनियों में सीवरेज व्यवस्था न होने के कारण लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। गंदा पानी खुले प्लॉटों, गलियों और सड़कों पर जमा हो जाता था इससे न केवल बदबू फैलती थी बल्कि मच्छरों और बीमारियों का खतरा भी बना रहता था। बरसात के मौसम में हालात और भी बदतर हो जाते थे। शहर की इन कॉलोनियों के लोग लंबे समय से इस समस्या के समाधान की मांग कर रहे थे।
इन कॉलोनियों को मिलेगा लाभ
परियोजना के तहत स्कूल बस्ती, दुर्गा मिल कॉलोनी, शीतलपुरी कॉलोनी, शिवपुरी कॉलोनी, राजनगर, हरिजन कॉलोनी, नेताजी कॉलोनी, रतन कॉलोनी, शोलो कॉलोनी, हनुमान नगर, ओमनगर, जोगिंद्र नगर, इंप्लाइज कॉलोनी, न्यू कृष्णा कॉलोनी, भटनागर कॉलोनी, रामबीर कॉलोनी, लोको प्राइवेट कॉलोनी, न्यू जवाहर नगर, सुंदरनगर कॉलोनी, अजमेर बस्ती, भूपेंद्र नगर, शर्मा नगर, भगत सिंह कॉलोनी, रामनगर कॉलोनी, विजय नगर, बुढा बाबा बस्ती, विकास नगर, रघु नगर, खेम नगर, दुर्गा कॉलोनी, चंद्र लोक कॉलोनी सहित अन्य क्षेत्रों को सीवरेज नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।
गंदा पानी सुरक्षित तरीके से निकासी तक पहुंचेगा
इन कालोनियों में बिछाई जाने वाली 73 किलोमीटर लंबी सीवरेज लाइन के माध्यम से घरों से निकलने वाला गंदा पानी सुरक्षित तरीके से निकासी तक पहुंचेगा। इससे गलियों में जलभराव, खुले नालों और अस्वच्छता की समस्या खत्म होगी। लोगों को साफ-सुथरा वातावरण मिलेगा और बीमारियों का खतरा भी काफी हद तक कम हो जाएगा।
हांसी रोड पर बनेगा 10 एमएलडी का एसटीपी
सीवरेज व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए हांसी रोड पर 10 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) क्षमता का एसटीपी स्थापित किया जाएगा। इस प्लांट में सीवरेज के गंदे पानी को आधुनिक तकनीक से साफ किया जाएगा। ट्रीटमेंट के बाद साफ पानी को कालवा-किनाना ड्रेन में छोड़ा जाएगा। इससे पर्यावरण को नुकसान नहीं होगा। एसटीपी से निकलने वाला ट्रीटेड पानी भविष्य में हरित पट्टियों की सिंचाई, औद्योगिक उपयोग या अन्य गैर-पीने योग्य जरूरतों में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा और भूमिगत जल पर निर्भरता कम होगी।
स्वास्थ्य, पर्यावरण और विकास तीनों को मिलेगा फायदा
परियोजना से न केवल सीवरेज समस्या का समाधान ही नहीं होगा बल्कि शहर के स्वास्थ्य और पर्यावरण में भी बड़ा सुधार आएगा। गंदे पानी के खुले बहाव से होने वाली बीमारियों, जैसे डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड पर अंकुश लगेगा। साफ-सुथरे वातावरण से लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा।
वर्जन
सीवरेज और एसटीपी जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलने से इन आउटर कॉलोनियों का विकास तेज होगा। शहर का सुनियोजित विस्तार संभव हो सकेगा। 41 करोड़ रुपये की यह परियोजना शहर के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। इससे लोगों को सीधी राहत मिलेगी। इस योजना को अब धरातल पर उतारने के लिए तैयारी कर ली है।
-भानूप्रताप, एक्सईन जनस्वास्थ्य विभाग जींद।