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जनस्वास्थ्य विभाग ग्रामीण उपभोक्ताओं पर डालेगा बिल का दोहरा भार

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ग्रामीण उपभोक्ताओं को भरना पडे़गा दोगुना पेयजल बिल
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। ग्रामीण क्षेत्र के पेयजल उपभोक्ताओं पर पानी के बिल की दोहरी मार पड़ने वाली है। जन स्वास्थ्य विभाग ने पानी का नया रेट तय किया है, जिसके तहत अब लोगों से दोगुना बिल वसूला जाएगा। 2017 से वसूला जाने वाला बिल उपभोक्ताओं को 2019 में भेजा जाएगा मगर वह भी दोगुना। इससे पहले विभाग ने मार्च 2015-17 तक का पानी का बिल वसूल चुका है। जन स्वास्थ्य विभाग ने बढ़ाए गए बिल को लेकर पत्र जारी कर दिया है। इस समय ग्रामीण क्षेत्र में 90790 ग्रामीण पेयजल के उपभोक्ता हैं। जिसमें से 582 ही लोगों के घरों में पानी के मीटर लगे हैं। बढ़ाया गया बिल जिन घरों में मीटर लगा है उनके अलावा, औद्योगिक व अन्य संस्थानों के वसूला जाएगा। इसके लिए जन स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय से मई 2017 में पत्र जारी किया गया था। जिसके आधार पर ही अब नए साल में बनने वाले पानी के बिल बनाए जाएंगे। नई व्यवस्था के अनुसार पेयजल के रेट करीब दोगुने हो जाएंगे। अब तक ग्रामीण क्षेत्र में बिना मीटर वाले सामान्य परिवारों से प्रति कनेक्शन हर माह 20 रुपये प्रति बिल वसूला जाता था जिसे अब बढ़ाकर 40 रुपये प्रति माह कर दिया है। इसी तरह अनुसूचित जाति के परिवारों से अभी 10 रुपये प्रति माह वसूला जाता था जिसे बढ़ाकर 20 रुपये प्रति कनेक्शन प्रति माह कर दिया गया है। इतना ही नहीं जिन घरों में पानी के मीटर लगे हैं उनसे दो रुपये प्रति किलो लीटर (1000 लीटर पानी) की दर से बिल लिया जाएगा। औद्योगिक क्षेत्रों में इसका रेट 10 रुपये प्रति किलोलीटर रखा गया है। किसी संस्थान से पांच रुपये प्रति किलो लीटर के हिसाब से नया बिल जमा करवाना होगा। इसी तरह से संस्थानों में सीवर का बिल पानी के बिल का 25 प्रतिशत वसूला जाएगा। पानी के इन नए बिलों से ग्रामीण क्षेत्र से जन स्वास्थ्य विभाग की आय दोगुनी होगी। अगर कोई ग्रामीण पानी का कनेक्शन लेता है तो उससे 500 रुपये और संस्थान या औद्योगिक परिसर के लिए कनेक्शन लिया जाता है तो दो हजार रुपये जन स्वास्थ्य विभाग को देना पड़ेगा।
पानी के लिए कर चुके हैं प्रदर्शन, पर हालत नहीं सुधरी
काब्रच्छा गांव में आज भी पानी की किल्लत है। यहां के लोगों ने कई बार पानी की समस्या को लेकर जन स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ रोष जताने के साथ मटका फोड़ प्रदर्शन कर चुके हैं। कुछ समय के लिए गांव में पानी की व्यवस्था को सुधारा भी जा चुका है। लेकिन बाद में दोबारा से व्यवस्था जस की तस बन जाती है।
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बिल भेद दिया जाता है, समस्या नहीं होती है दूर
जन स्वास्थ्य विभाग को कई बार शिकायत देने के बाद भी गांव में पानी की व्यवस्था सुचारु नहीं हो पाई है। आए दिन पानी को लेकर समस्या बनी रहती है। गांव में पानी का कनेक्शन लेने का कोई फायदा नहीं है। जन स्वास्थ्य विभाग पानी के बिल के लिए तो पत्र भेज देता है, लेकिन समस्या के समाधान के लिए गांव आकर कोई नहीं देखता।
पूनम, डाहौला गांव
जलघर से दूर घरों में नहीं पहुंचता है पानी
गांव में पानी के कनेक्शन के लिए जन स्वास्थ्य विभाग ने उचित व्यवस्था नहीं की। जिन मकानों के नजदीक जल घर हैं, वहां पर पानी ज्यादा मिलता है और जो मकान दूर हैं वहां पर नाममात्र और कभी कभार ही पानी पहुंच पाता है। कनेक्शनों का लेवल नहीं होने के कारण यह दिक्कत बनी हुई है। पानी के बिल बढ़ाने से पहले इस समस्या को दूर किया जाना चाहिए।
सरोज, थुआ गांव
पानी नहीं पहुंचता, कैसे देंगे बिल
गांव के नीचे के हिस्सों तक ही पानी की सप्लाई मिलती है। ऊंचे स्थानों पर पानी पहुंचाने में जनस्वास्थ्य विभाग भी नाकाम साबित हो रहा है। इसको लेकर कई बार अधिकारियों से शिकायत भी की जाती है, लेकिन इस व्यवस्था को सुधारने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जाता। ऐसे में लोगों पर पानी के बिल का बोझ डालना गलत है।
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पूजा डाहौला
अभी तक पुराने रेटों के बिल ही ग्रामीणों से लिए जा रहे हैं। जब नए बिल 2018-19 के बनेंगे तो तभी यह नए रेट ग्रामीणों से वसूल किए जाएंगे। इसके लिए मुख्यालय से पानी के नए रेटों का पत्र जारी हो चुका है, लेकिन अभी तक किसी भी ग्रामीण उपभोक्ता के पास नए रेट का बिल नहीं भेजा गया। जब नए बिल ग्रामीण क्षेत्रों के बनाए जाएंगे तभी निर्धारित रेट के बिल वसूले जाएंगे।
जिला जल संरक्षण अधिकारी रणधीर मताना।
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