14जेएनडी15: जलघर का निरीक्षण करते हुए जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारी। स्रोत: विभाग
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जींद। शहर को नहरी पानी उपलब्ध करवाने की वर्षों पुरानी योजना अब साकार होने की ओर बढ़ रही है। गांव बडौदी में करीब 388 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन जलघर का लगभग 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने वर्ष 2026 के अंत तक शहरवासियों को बडौदी जलघर से नहरी पेयजल की आपूर्ति शुरू करने का लक्ष्य रखा है।
प्रमुख अभियंता देवेंद्र दहिया ने शुक्रवार को बडौदी जलघर का निरीक्षण कर निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने पुराना बस स्टैंड, राजकीय कॉलेज और राजकीय अस्पताल में चल रहे विभागीय कार्यों का भी निरीक्षण किया। अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा में पूरा किया जाए।
उन्होंने कहा कि शहर के विकास से जुड़े इतने बड़े प्रोजेक्ट में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। निर्माण कार्य में गुणवत्ता और पारदर्शिता का विशेष ध्यान रखा जाए ताकि शहरवासियों को लंबे समय तक इसका लाभ मिल सके। इस अवसर पर मुख्य अभियंता दिनेश कुमार सैनी, मुख्य अभियंता टीआर पंवार, अधीक्षक अभियंता विक्रम सिंह मोर, कार्यकारी अभियंता भानु प्रकाश शर्मा व प्रशांत सिल्वानिया मौजूद रहे।
नरवाना-भाखड़ा ब्रांच से बडौदी तक 28 किमी लंबी पाइपलाइन का काम जारी
अधीक्षक अभियंता विक्रम सिंह मोर ने बताया कि बडौदी में करीब 41 एकड़ भूमि पर जलघर का निर्माण किया जा रहा है। करीब 388 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट में लगभग 90 करोड़ रुपये जलघर के निर्माण पर खर्च होंगे। इसके अलावा जींद शहर में पेयजल आपूर्ति का नेटवर्क मजबूत करने के लिए करीब 300 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन और 18 बूस्टरों के निर्माण पर लगभग 80 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इससे शहर के विभिन्न क्षेत्रों तक नहरी पानी पहुंचाने का नेटवर्क तैयार होगा। जलघर में चार वाटर टैंक बनाए जा रहे हैं जिनमें से तीन का निर्माण पूरा हो चुका है। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (डब्ल्यूटीपी) का लगभग 70 प्रतिशत काम भी पूरा हो गया है। नहरी पानी को बडौदी जलघर तक पहुंचाने के लिए नरवाना-भाखड़ा ब्रांच से करीब 28 किलोमीटर लंबी और 48 इंच व्यास की पाइपलाइन बिछाने का काम भी जारी है।
शहर की पेयजल व्यवस्था को मिलेगा नया आधार
नहरी पानी की आपूर्ति शुरू होने के बाद जींद शहर की पेयजल व्यवस्था को नया आधार मिलने की उम्मीद है। बढ़ती आबादी और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए यह परियोजना शहर के आधारभूत विकास की महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है। इससे भूमिगत जल पर निर्भरता कम करने और शहर में नियमित पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।