गतौली गांव के उप स्वास्थ्य केंद्र की मरम्मत का विरोध करते ग्रामीणों की फाइल फोटो।
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जिले में इस समय 174 उपस्वास्थ्य केंद्र कार्यरत हैं, लेकिन इनमें से 61 उपस्वास्थ्य केंद्रों को आज तक अपना भवन नहीं मिल पाया है। 99 उपस्वास्थ्य केंद्र सरकारी भवनों में चल रहे हैं, मगर इनमें से भी 15 के भवन कंडम घोषित किए जा चुके हैं। इसके अलावा 14 उपस्वास्थ्य केंद्र निजी भवनों में चल रहे हैं।
पंचायत भवनों में चल रहे 61 उपस्वास्थ्य केंद्रों का भवन कई बार बदला जा चुका है, जिसकी वजह से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। जिला स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कंडम भवनों की जगह नए भवन तथा निजी भवनों में चल रहे उपस्वास्थ्य केंद्रों के लिए अपने भवन स्थापित करवाने के लिए कई बार पत्र लिखे जा चुके हैं, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा है।
सफीदों के हरिगढ़ गांव में उपस्वास्थ्य केंद्र के भवन में ग्रामीणों ने उपले रखने शुरू कर दिए। भवन कंडम होने के बावजूद नए भवन के निर्माण के लिए स्वास्थ्य निदेशालय से कोई बजट नहीं मिला। इस कारण उपस्वास्थ्य केंद्र पंचायत भवन में शिफ्ट करना पड़ा। इसी प्रकार गतौली गांव स्थित उपस्वास्थ्य केंद्र का भवन कंडम घोषित हो चुका है। इसकी मरम्मत के लिए स्वास्थ्य निदेशालय ने बजट जारी किया, लेकिन ग्रामीणों ने यह कहते हुए मरम्मत का विरोध किया कि मरम्मत करके इस भवन पर पैसे बर्बाद करने वाली बात है। यदि सरकार को बनाना है तो नया भवन ही बनाए। दो वर्ष से उपस्वास्थ्य केंद्र ग्राम सचिवालय में चल रहा है। इसी प्रकार पोकरी खेड़ी गांव में अभी तक उपस्वास्थ्य केंद्र का भवन नहीं बना है। न ही अभी तक यहां पर स्टाफ की नियुक्ति हुई है। जिले में अपने भवनों की कमी के कारण कई बार उपस्वास्थ्य केंद्र के भवनों को बदलना पड़ता है। कभी ग्राम सचिवालय में तो कभी निजी भवनों में उपस्वास्थ्य केंद्र शिफ्ट किए जाते हैं। इस कारण बार-बार भवन बदलने से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं। जिले की लगभग आठ लाख जनसंख्या इन उपस्वास्थ्य केंद्रों से स्वास्थ्य सेवाएं लेती है।
उपस्वास्थ्य केंद्रों के लिए अपने भवन बनाने तथा कंडम भवनों को दोबारा बनवाने की मांग स्वास्थ्य निदेशालय के पास भेजी जा चुकी हैं। उम्मीद है जल्द ही उपस्वास्थ्य केंद्रों के लिए सरकार बजट जारी करेगी।
डॉ. मनजीत सिंह, सिविल सर्जन, जींद।