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Jind News: अस्पताल में 55 चिकित्सकों का काम 23 के जिम्मे

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15जेएनडी24: नागरिक अस्पताल में मरीज की जांच करते चिकित्सक। संवाद
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जींद। जिला का नागरिक अस्पताल पिछले वर्षों से चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा, हालांकि सरकार स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है। जिले के नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों की कमी खत्म नही हो पा रही। यहां पर 55 चिकित्सकों का काम 23 से चलाया जा रहा है। अब एक और चिकित्सक ने वीआरएस लेने के लिए पत्र लिखा है। इससे अस्पताल की व्यवस्था पूरी तरह से गड़बड़ा जाएगी।
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इससे पहले अस्पताल से आईं सर्जन डाॅ. गितांशु, डाॅ. पूनम कैजुअल्टी व डाॅ. सीमा वशिष्ठ जा चुके हैं, अब ईएनटी बृजेंद्र सिंह के वीआरएस लेने से अस्पताल में ओपीडी बहुत ज्यादा प्रभावित होगी, हालांकि डॉ. बृजेंद्र सिंह एमओ है। जिला अस्पताल में 55 पद चिकित्सकों के स्वीकृत हैं, लेकिन मात्र 23 चिकित्सक ही काम कर रहे हैं, जबकि प्रतिदिन ओपीडी 1600 से 1800 के बीच होती है। जब से अस्पताल जिला मुख्यालय पर चला है। उससे लेकर आज तक स्वास्थ्य विभाग चिकित्सकों की कमी को दूर नहीं कर पाया। जिले में एसएमओ के 20 पद स्वीकृत हैं, लेकिन आठ ही एसएमओ तैनात हैं।
विभाग का प्रशासनिक कार्य देखने के लिए जिले में 9 डिप्टी सिविल सर्जनों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन दो ही डिप्टी सिविल सर्जनों की तैनाती हैं। ऐसे में विभाग ने प्रशासनिक कार्य चलाने के लिए एसएमओ या एमओ को डिप्टी सिविल सर्जन के पद पर तैनात किया गया है। इसके चलते प्रशासनिक कार्य देख रहे इन चिकित्सा अधिकारी मरीजों की जांच नहीं कर पाते हैं। अगर जिले को बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवानी है, तो चिकित्सकों की कमी को पूरा करना होगा। दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखना होगा। स्पेशलिस्ट, रेडियोलाजिस्ट, महिला स्पेशलिस्ट, गायनोलॉजिस्ट, हृदय, चरम रोग चिकित्सकों की तैनाती करनी होगी। इसके अलावा नागरिक अस्पताल में कोरोना काल में लगाया गया ऑक्सीजन प्लांट बजट के अभाव में बंद पड़ा है। इसकी मरम्मत के लिए करीब डेढ लाख रुपये के बजट की जरूरत हैं।
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यह है पूरे जिले में चिकित्सकों व अस्पतालों का आंकड़ा
जिले में नागरिक अस्पतालों की संख्या 4 है। इसके अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र 8, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 25, जिले में चिकित्सकों के स्वीकृत पद 222, जिले में तैनात चिकित्सक 88, खाली पद 134 हैं।
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16 साल से अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट का पद खाली

नागरिक अस्पताल में पिछले 16 साल से किसी भी रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति नहीं हुई है। बिना रेडियोलॉजिस्ट के कारण जिले के लोगों को निजी अस्पतालों में महंगी फीस पर अल्ट्रासाउंड करवाने पड़ रहे हैं। वहीं, लैब में भी 14 पद स्वीकृत हैं, जबकि केवल 7 तकनीशियन ही काम कर रहे हैं।
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अस्पताल में आईसीयू चलाना भी मुश्किल

नागरिक अस्पताल के पुराने भवन में लगभग तीन वर्ष पहले बने आइसीयू को भी चिकित्सकों के अभाव में चलाने में परेशानी बनी हुई है। आइसीयू के निर्माण पर दो करोड़ से अधिक की राशि खर्च की गई थी। आईसीयू में 18 बेड की सुविधा दी गई है। इसमें चार बेड बच्चों के लिए हैं। वर्ष 2024 में आइसीयू शुरू तो हो गया, लेकिन चिकित्सक व दूसरे स्टाफ की कमी के चलते गंभीर मरीजों को अब भी पूरा इलाज नहीं मिल रहा हैं।

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कभी वीआईपी ड्यूटी तो कभी कैंप बढ़ा रहे परेशानी

चिकित्सकों की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होना लाजमी है। इसके अलावा कभी वीआईपी ड्यूटी तो कहीं कोई स्वास्थ्य कैंप तो कभी दिव्यांग कैंप के लिए चिकित्सकों को जाना पड़ता है। इससे अस्पताल में आने वाले मरीजों को परेशानी होती है। मरीजों व उनके तीमारदारों को पता ही नहीं चल पाता है कि अस्पताल में उनके उपचार से संबंधित चिकित्सक है या नहीं।

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अस्पताल में कई चिकित्सकों की कमी, बेहतर उपचार के लिए प्रयासरत
विशेषज्ञों व चिकित्सकों की कमी अस्पताल में लंबे समय से है। इसके बावजूद भी जितनी सुविधाएं उपलब्ध हैं, उनके माध्यम से चिकित्सकों द्वारा अस्पताल में उपचार की बेहतर सुविधाएं देने का प्रयास किया जाता है। स्वास्थ्य निदेशालय से समय-समय पर चिकित्सकों और अन्य कर्मचारियों की मांग की जाती है। अब ईएनटी चिकित्सक डॉ. बृजेंद्र सिंह ने वीआरएस के लिए पत्र लिखा है।
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-डॉ. राजेश भोला, डिप्टी एमएस, नागरिक अस्पताल जींद।
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