राजकीय पीजी कॉलेज में डीसी रेट की भर्तियों में घोटाले का मामला : एसडीएम ने भर्ती को बताया गलत, रिपोर्ट डीसी को भेजी
अमर उजाला ब्यूरो
सफीदों। राजकीय पीजी कॉलेज में हुई डीसी रेट की भर्तियों में हुए घोटाले की जांच सफीदों के एसडीएम मनदीप कुमार ने पूरी करके रिपोर्ट डीसी अमित खत्री को भेज दी है। रिपोर्ट में मनदीप कुमार ने इन भर्तियों को पूरी तरह से गलत करार दिया है। इस कारण कॉलेज के कई अधिकारियों पर गाज गिरना तय है।
बता दें कि राजकीय पीजी कॉलेज में कई महीनों पूर्व विभिन्न पदों पर डीसी रेट पर भर्तियां की गई थी और उन भर्तियों में भाई भतीजावाद व भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। इस संबंध में एक शिकायत सफीदों के वार्ड सात निवासी शिव प्रकाश ने जयपुर गांव में लगे जनता दरबार में डीसी जींद अमित खत्री को की थी। डीसी ने इस मामले की जांच सफीदों के एसडीएम मनदीप कुमार को सौंपी थी। इसी प्रकार की एक शिकायत सिंघाना गांव निवासी सुभाष ने भी की थी। शिकायतकर्ताओं का कहना था कि राजकीय पीजी कॉलेज सफीदों में हुई डीसी रेट पार्ट-दो के तहत की गई भर्तियों में तात्कालीन कॉलेज प्राचार्य हंसराज ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए भारी घोटाला किया और नियमों को ताक पर रखते हुए अपने चहेतों को भर्ती किया। भर्ती में ना तो पॉलिसी पार्ट-2 के नियमों की पालना हुई और ना ही भर्ती के कोई मापदंड अपनाए गए। एक भर्ती प्रक्रिया में अलग-अलग भर्ती नियम बनाकर अपने चहेतों को भर्ती किया गया। यह भर्ती रोजगार कार्यालय सफीदों के माध्यम से ना करवाकर प्राचार्य ने अपने हिसाब से की। नियमों को उल्लंघन करते हुए कश्मीर सिंह को लाइब्रेरी सहायक पद पर रिटेन किया गया, क्योंकि यह अभ्यर्थी पार्ट वन में न्यूनतम दसवीं पास था और इसे पार्ट 2 में रिटेन किया गया, जिसमें न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 12वीं पास है।
जांच के दौरान प्राचार्य हंसराज ने अपने ब्यान में कहा कि उन्होंने रोजगार कार्यालय से पत्राचार इसलिए नहीं किया क्योंकि यह प्रक्रिया लंबी थी। अखबार में विज्ञापन देने के बाद 11 पदों के लिए कुल 1664 आवेदन प्राप्त हुए थे। सभी पदों पर नियुक्तियां मेरिट के आधार पर की गई हैं। आउटसोर्स पालिसी पार्ट-1 के अंतर्गत पहले से कार्यरत योग्य कर्मचारियों को आउटसोर्स पालिसी पार्ट-2 में अन्य अभ्यर्थियों पर वरीयता दी गई है। इस सारे में मामले की जांच रिपोर्ट में एसडीएम ने कहा कि आउटसोर्स पार्ट-1 के कर्मचारियों को पार्ट-2 में बदलने में कॉलेज प्रशासन कोई पुख्ता सबूत नहीं दे पाया और सरकार की ओर से इस बारे में कोई गाइड लाइन जारी नहीं की गई। कॉलेज प्रशासन द्वारा इस प्रकार की नियुक्तियों में अपनी मनमानी की गई है।