जींद। नशे की गिरफ्त में फंसे 364 लोगों ने फिर से जीना सीख लिया है। किसी ने परिवार के लिए तो किसी ने अपने भविष्य के लिए नशे को अलविदा कह दिया। नशा मुक्ति टीम ने घर-घर दस्तक देकर पीड़ितों को खोजा, उनका इलाज कराया और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा।
जिले के 301 गांवों और 97 वार्डों में किए गए सर्वे के दौरान 2150 नशा पीड़ितों की पहचान हुई। इनमें से 1928 लोगों के डोजियर फॉर्म भरकर उनकी जानकारी जुटाई गई जबकि 1748 मामलों को हॉक पोर्टल पर अपलोड कर निगरानी शुरू की गई।
नशा मुक्ति अभियान के तहत जिले में छह नशा मुक्ति केंद्र संचालित हैं जहां एक साथ 75 मरीजों का इलाज किया जा सकता है। गंभीर स्थिति वाले 41 नशा पीड़ितों को केंद्रों में भर्ती करवाया गया और नागरिक अस्पताल के माध्यम से उनका इलाज शुरू करवाया गया।
काउंसलिंग से बदली जिंदगी, युवाओं को मिली नई राह
अभियान के दौरान 632 नशा करने वाले लोगों की काउंसलिंग करवाई गई जबकि जिले में 1286 नशा पीड़ितों का इलाज जारी है। नशा मुक्ति टीम के इंचार्ज नरेश ढांडा के नेतृत्व में ईशा, नीलम और संदीप लगातार लोगों को जागरूक कर रहे हैं। नशे की चपेट में आए लोगों की पहचान कर रहे हैं। टीम के प्रयासों से कई युवा स्मैक और चिट्टे जैसी लत छोड़कर सामान्य जीवन की ओर लौटे हैं। इनमें से एक युवा बाद में सरकारी नौकरी हासिल करने में भी सफल रहा।
जनभागीदारी से मजबूत हुआ अभियान
नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए जिले में 768 कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसके अलावा 27 विशेष शिविरों में 1088 नशा पीड़ितों ने हिस्सा लिया। शिविरों में स्वास्थ्य जांच, परामर्श और पुनर्वास योजनाओं की जानकारी दी गई। युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए 93 खेल गतिविधियां भी आयोजित की गईं। अब तक 2 लाख 19 हजार 853 लोगों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया जा चुका है। इसके परिणामस्वरूप जिले के 138 गांव और 28 वार्ड नशा मुक्त घोषित हो चुके हैं। कुल 166 गांव, वार्ड और कॉलोनियां ड्रग्स फ्री श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं।
यह गांव किए हॉट स्पॉट घोषित
जिले के धमतान साहिब, आफताबगढ़, संडील, नरवाना की चमेला कॉलोनी, लोहचब, बोहतवाला और रंसीदा गांव को नशे के हॉट स्पॉट के रूप में चिह्नित किया गया है। इन गांवों में पुलिस नशा रुकवाने के लिए प्रयासरत है।
इन गांवों में रुका नशे का प्रभाव
रेवर, मनोहरपुर, अशरफगढ़ और शहर की बूढ़ा बाबा बस्ती में ग्रामीणों और पुलिस के सहयोग से नशे पर प्रभावी नियंत्रण पाया गया। ग्रामीणों ने रात में पहरा देकर नशा बेचने वालों को पकड़ा और पुलिस के हवाले किया। गांवों में बनी समितियों ने नशे के खिलाफ मोर्चा संभाला। अशरफगढ़ गांव में नशा रोकने के दौरान उस समय चौकी इंचार्ज मोनिका का ग्रामीणों को बेहतर सहयोग मिला। इसके बाद गांव में पूरी तरह से सूखा नशा व कच्ची शराब पर रोक लग गई।
वर्जन
नशे को रोकने के लिए पुलिस काम कर रही है। जिले में नशा मुक्ति टीम ने इस पर बेहतर काम किया है। कई युवाओं को स्मैक व चिट्टे की लत से दूर किया गया। इनमें से एक युवा बाद में सरकारी नौकरी पर भी लगा है। इसके इलावा टीम के प्रयासों से दर्जनों युवा ऐसे हैं। जो समाज की मुख्य धारा में आ चुके हैं और अपना काम कर रहे हैं। अब तक जिले में 364 युवाओं को नशे से दूर किया जा चुका है
-कुलदीप सिंह एसपी जींद।