जींद। 73वें संविधान संशोधन में पंचायतों को दिए गए अधिकारों की मांग को लेकर सरपंच एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने वीरवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को डीसी अमित खत्री के माध्यम से ज्ञापन भेजा। सरपंचों ने कहा कि गांव में विकास का पूरा काम पंचायतों को ही दिया जाना चाहिए। इस दौरान सरपंचों ने 11 मांगों का ज्ञापन सरकार को भेजा।
सरपंच एसोसिएशन के जिला प्रधान सुरेंद्र राणा के नेतृत्व में पहुंचे सरपंचों ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में गांवों में विकास कार्य करवाने में परेशानियां आ रही हैं। एसोसिएशन ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद निर्माण सामग्री के रेट बढ़े हैं। इन लोगों ने कहा कि पंचायतों को कर में रियायत मिलनी चाहिए। जीएसटी लागू होने से जहां निर्माण सामग्री के रेट बढ़ गए हैं, वहीं सरकार द्वारा शुरू की गई ग्राम पंचायत विकास योजना के पूरी तरह से लागू नहीं होने से भी उन्हें परेशानी हो रही है। सरकार इस योजना को पूरी तरह से लागू करे या खत्म कर दे। डीसी ने जिला प्रशासन के स्तर की समस्याओं के समाधान का तुरंत समाधान का आश्वासन दिया तथा अन्य मुद्दों को सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।
सरपंचों की मांगें
ये रखी मांगें
1. संविधान में पंचायती राज अधिनियम के 73वें संशोधन को लागू किया जाए।
2. सभी सरकारी अधिकारी सरपंच को प्राथमिकता व गंभीरता के साथ सुने तथा उनकी समस्याओं का निवारण करें।
3. सरपंच से संबंधित किसी भी विवाद पर अधीक्षक स्तर पर जांच के बाद ही एफआईआर दर्ज होनी चाहिए।
4. सरपंचों का मानदेय खत्म करके वेतन 30 हजार रुपये व पंच को 10 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाए। कार्यकाल खत्म होने के बाद पेंशन का प्रावधान किया जाए।
5. ग्राम पंचायतों द्वारा जो भी विकास कार्य करवाए जाते हैं, उन पर जीएसटी को खत्म किया जाए।
6. ग्राम विकास योजना को समाप्त कर चिह्नित कार्यों के लिए राशि खर्च करने की सीमा समाप्त हो और गांव के विकास पूरा जिम्मा पंचायत का हो।
7. कुछ पंचायतों के पास अपना फंड नहीं होता, ऐसे में पंचायत को मिसलेनियस फंड के रूप में साल में दस लाख रुपये दिए जाएं।
8. डेरे और ढाणियों के रास्ते पक्के करवाने का अधिकार पंचायत को दिया जाए।
9. बिजली निगम का पंचायतों पर किया गया जुर्माना समाप्त हो और स्ट्रीट लाइट बिल मुक्त होनी चाहिए। बिजली निगम द्वारा ग्राम पंचायत को पोल टैक्स दिया जाए।
10. बुजुर्गों को आ रही परेशानी को देखते हुए पेंशन वितरण का काम हर गांव में करवाया जाए व नए राशन कार्ड की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए।
मांगें नहीं मानी, तो पार्षदों के साथ खाप प्रतिनिधि भी बैठेंगे अनशन पर
जींद। पिछले कुछ समय से ग्रांट राशि वितरण में भेदभाव के आरोप लगाकर आंदोलन की धमकी दे रहे तीन जिला पार्षदों ने वीरवार को खाप पंचायत प्रतिनिधियों के साथ डीसी अमित खत्री से मुलाकात की। इस दौरान जिला पार्षदों ने खाप के साथ बैठक कर सरकार को दस अक्टूबर तक का अल्टीमेटम देते हुए भूख हड़ताल करने की चेतावनी दी है।
जिला पार्षद अमित निडानी, सतपाल व राजेंद्र धीमान वीरवार को मलिक खाप के अध्यक्ष कुलदीप मलिक व अन्य खाप के लोगों के साथ डीसी अमित खत्री से मिले। डीसी ने पार्षदों के वार्डों में डी प्लान के तहत काम करवाने का आश्वासन देते हुए उनके वार्डों के विकास कार्यों की सूची मांगी। पार्षदों का आरोप है कि जिला परिषद चेयरपर्सन उनके वार्डों में विकास के लिए ग्रांट जारी नहीं कर रही हैं, जबकि चेयरपर्सन का कहना है कि बार-बार मांगने के बावजूद जिला पार्षद उन्हें काम की सूची नहीं दे रहे हैं। पहले इन पार्षदों ने स्वतंत्रता दिवस के बाद लघु सचिवालय में आमरण अनशन पर बैठने का ऐलान किया था। वीरवार को इसमें खाप पंचायतों को ट्विस्ट आया। पार्षदों का कहना है कि कई खाप प्रतिनिधियों ने उनको अनशन आलने की अपील की है। इनका कहना है कि मलिक खाप, खेड़ा खाप, धमतान तपा, धुआ तपा, कंडेला तपा, पूनिया खाप के प्रतिनिधियों ने तीनों पार्षदों को 10 अक्टूबर तक अनशन टालने की बात कहते हुए डीसी के माध्यम से सरकार तक उनकी बात पहुंचाने का आश्वासन दिया। बृहस्पतिवार दोपहर को पार्षदों के साथ खाप प्रतिनिधि डीसी अमित खत्री से मिले और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
मिला है आश्वासन
डीसी ने विकास कार्यों के लिए डी प्लान से राशि जारी करने का आश्वासन दिया है। इसके लिए कामों की सूची मांगी गई है। ऐसे में पार्षद कामों की सूची सौंप देंगे। इसके बावजूद यदि ग्रांट जारी नहीं होती तो दस अक्टूबर के बाद अनशन शुरू किया जाएगा।
सतपाल उर्फ सतु संगपुतरा, पार्षद वार्ड नंबर 14