फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jhajjar-Bahadurgarh News: सिविल अस्पताल में नहीं एक भी नियमित चर्म रोग विशेषज्ञ

Fri, 15 Mar 2024 12:02 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
झज्जर। होली पर्व पर कैमिकल वाले रंगों का प्रयोग ध्यान से करें। क्योंकि जिले के सिविल अस्पताल में फिलहाल एक भी नियमित चर्म रोग विशेषज्ञ नहीं है। यदि चर्म संबंधी समस्या होती है तो निजी अस्पताल या पीजीआईएमएस रोहतक ही मरीजों को जाना पड़ सकता है। यहां एक डॉक्टर की तैनाती है, लेकिन वह चाइल्ड केयर लीव पर हैं। वर्ल्ड मेडिकल कॉलेज से अनुबंध के आधार पर सप्ताह में एक ही दिन चर्म रोग विशेषज्ञ यहां आते हैं।
विज्ञापन

रंगों का पर्व होली इस बार 24 और फाग 25 मार्च को है। सप्ताह पहले ही होली के रंग व पिचकारियां चलनी शुरू हो जाती हैं। इस समय कैमिकल युक्त रंग भी प्रयोग होते हैं, इससे त्वचा को नुकसान पहुंचता है। कैमिकल वाले रंगों की बजाय प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करने की अपील स्वास्थ्य विशेषज्ञ करते रहते हैं। वहीं डॉक्टरों का कहना है कि कैमिकल वाले गुलाल हमारे मुंह और श्वास के साथ श्वसन नलिका में प्रवेश कर समस्या बढ़ा सकते हैं। इससे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। मुंह और श्वास नलिका में कैमिकल वाले रंग पहुंचने से घरघराहट, खांसी और बलगम होने की समस्या तक हो सकती है।


लगाई जाएंगी अतिरिक्त ड्यूटी
अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि होली को देखते हुए दो दिन के लिए चिकित्सकों की अस्पतालों में अतिरिक्त ड्यूटियां लगाई जाएंगी। खास तौर पर आंखों के डॉक्टर की अलग से ड्यूटी लगेगी। इसी प्रकार से इस दौरान नशे व मारपीट के मामले ज्यादा आते हैं, ऐसे में आपातकालीन में अतिरिक्त चिकित्सकों व स्टॉफ की ड्यूटी लगाई जाएंगी।
विज्ञापन




कैमिकल वालों रंगों से हो सकता है नुकसान

स्किन एलर्जी : कैमिकल युक्त रंगों से त्वचा पर एलर्जी होना आम है। इसके अलावा चकत्ते या जलन पैदा हो सकती है।


आंखों का इंफेक्शन : रंगों में कई तरह के कैमिकल्स का उपयोग किया जाता है। अगर यह आंख में घुस गया तो इससे रेटिना को भी नुकसान पहुंच सकता है। इसके अलावा आंखों का संक्रमण भी हो सकता है। रंग की वजह से आंखों में लाली हो सकती है, जो आगे चलकर कंजंक्टिवाइटिस और यहां तक कि अंधेपन का कारण भी बन सकती है।

कैसर : रंगों में मौजूद रसायन त्वचा के कैंसर के साथ-साथ किसी भी अन्य आंतरिक कैंसर का कारण भी बन सकता है।


किडनी को नुकसान : होली के रंग में लेड ऑक्साइड भी मिलाया जाता है। इसकी वजह से किडनी को नुकसान और यहां तक किडनी फेल भी हो सकती है।



अस्थमा : होली के रंगों में क्रोमियम होता है, जो सांस के माध्यम से फेफड़ों में पहुंच जाता है और ब्रोन्कियल अस्थमा का कारण बन सकता है। रसायन फेफड़ों में प्रवेश करता है और श्वसन वायुमार्ग को अवरुद्ध करता है।



हड्डियों पर असर व निमोनिया : जब छोटे बच्चे होली के दौरान रंगों में भारी मात्रा में कैडमियम के संपर्क में आते हैं तो यह हड्डियों के निर्माण को बाधित करना शुरू कर देता है। यह हड्डियों को कमजोर कर सकता है। इसी प्रकार से रंगों जब सांस के जरिये आपके फेफड़ों में पहुंच जाता है तो इससे फेफड़ों से जुड़ी बीमारी हो सकती है।

वर्जन
होली रंगों का पर्व है। हमें प्राकृतिक रंगों के जरिये होली खेलनी चाहिए। मार्केट में कैमिकल वाले रंग भी हैं। इसका प्रयोग करने से त्वचा, आंखों सहित कैंसर जैसे रोग होने का खतरा है। हमें प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करना चाहिए। इस दिन कुछ लोग नशा करते हैं, यह बिल्कुल गलत है। इससे हादसे और लड़ाई-झगड़े के केस बढ़ते हैं। इसलिए ऐसा नहीं करना चाहिए। सबको मिल-जुलकर होली मनानी चाहिए। होली के दौरान अतिरिक्त स्टॉफ की व्यवस्था अस्पतालों में की जाएगी।
विज्ञापन

- डॉ. ब्रह्मदीप सिंह, सिविल सर्जन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें