शहर की कोई सड़क व सार्वजनिक स्थल ऐसा नहीं है जहां पर लोगों ने प्रचार के लिए बोर्ड व अवैध रूप से होर्डिंग न लगाए हों। स्थिति यहां तक बनी हुई है की बिजली के खंभों से लेकर ट्रैफिक लाइट तक होर्डिंग लगाए गए हैं लेकिन नगर परिषद की तरफ से इस तरह कोई विशेष ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यह अवैध होर्डिंग व बोर्ड लोगों के लिए परेशानी बनते जा रहे हैं। अपने प्रचार के चक्कर में संस्थाओं व राजनीतिक लोगों की तरफ से बगैर अनुमति के ही जगह-जगह होर्डिंग व बोर्ड लगाए गए हैं।
अगर स्ट्रीट लाइट ठीक करनी हो या फिर बिजली कर्मचारियों को कम हो पर चढ़कर लाइनों को ठीक करना हो तो यह बोर्ड उनके लिए भी परेशानी का सबब बने हुए हैं। अवैध रूप से लगाए जा रहे बोर्डों के कारण नगर परिषद को राजस्व का भी नुकसान हो रहा है, लेकिन नगर परिषद की तरफ से केवल 33 स्थानों पर ही यूनिपोल लगाकर होर्डिंग की अनुमति दी जाती है जिसका किराया संबंधित ठेकेदार की तरफ से वसूल किया जाता है और नगर परिषद को साल भर में दी जाने वाली राशि की ही अदायगी की जाती है।
शहर में करीब 10 हजार से अधिक बिजली व स्ट्रीट लाइटों के खंभे लगे हुए हैं जिन पर बोर्ड व होर्डिंग सरेआम लगे दिखाई दे रहे हैं। नगर परिषद की तरफ से 3 साल में टेंडर छोड़ा जाता है और हर वर्ष 10 फीसदी उस राशि पर बढ़ोतरी की जाती है। वर्ष 2014 में नगर परिषद के की तरफ से करीब 12 रुपये में टेंडर छोड़ा गया था और उसके बाद उसी ठेकेदार को एक बार फिर से टेंडर को 3 साल के लिए बढ़ा दिया गया था। फिलहाल ठेकेदार से नगर परिषद करीब 15 लाख रुपये वसूलती है।
नगर परिषद की तरफ से शहर के पुराने बस स्टेंड, नए बस स्टेंड, सिलानी गेट, सब्जी मंडी के सामने, लघु सचिवालय, कोर्ट परिसर के पास, तहसील रोड, रेवाड़ी रोड, बाईपासों के चौक, चौराहों, रेलवे स्टेशन, रेलवे फाटकों के पास, शहर के अधिकांश चौक चौराहों, सामान्य अस्पताल सहित 33 स्थानों पर यूूनिपोल प्रचार के लिए लगाए गए हैं।
नगर परिषद की तरफ से लगाए गए यूनीपोल के अलावा कहीं भी अवैध होर्डिंग व बोर्ड लगाए गए हैं। उन संस्थाओं व लोगों को नोटिस जारी किए जाते हैं। नगर परिषद की तरफ से भी इन्हें हटाया जाता है। - नवीन देशवाल, नगर अभियंता, नगर परिषद, झज्जर।