घोड़ी पर सवार मेहंदी लगे हाथों वाली दुल्हन पूजा।
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बदलते समय के साथ अब लोगों की सोच में भी बदलाव आने लगा है। बदलाव लाने का प्रयास कई युवा कर रहे हैं। ऐसा ही काम झज्जर के बादली क्षेत्र में माजरी गांव की पूजा बाल्याण ने अपनी शादी से किया। यहां घोड़ी पर दूल्हे की तरह सजी पूजा गांव की गलियों से गुजरी तो देखने के लिए ग्रामीण उमड़ पड़े। ग्रामीण क्षेत्र में दुल्हन ने पूरे गांव में घुड़चढ़ी निकालकर नया संदेश देने का प्रयास किया। शादी से पहले दुल्हन घोड़ी पर सवार होकर बैंड बाजे के साथ निकली और तमाम रिश्तेदार नाचते गाते हुए उसके साथ चले।
माजरी गांव निवासी दुल्हन पूजा पुत्री रमेशचंद बाल्याण ने घोड़ी पर बैठने की वह रस्म निभाई जो आमतौर पर लड़के की शादी में होती है। घोड़ी पर बैठी दुल्हन पर चावल छिड़कने की रस्म छोटी बहन ने निभाई। रास्ते में ग्रामीणों ने शगुन राशि देकर से दुल्हन को आशीर्वाद भी दिया। दुल्हन घोड़ी पर सवार होकर पूरे गांव का चक्कर लगाते हुए फेरों के लिए विवाह स्थल तक पहुंची। घोड़ी के आगे वैवाहिक कार्यक्रम के अनुसार घोड़ी, ऊंट और बंदरों ने करतब दिखाए।
इस दौरान दुल्हन की सहेलियों ने जमकर डांस किया। आमतौर आपने अभी तक शादियों में दूल्हे को ही घोड़ी पर चढ़कर विवाह स्थल तक पहुंचते हुए देखा होगा, लेकिन माजरी गांव में दुल्हन के घोड़ी चढ़ने की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं। चार पुत्रियों के पिता सेवामुक्त सैनिक रमेशचंद ने अपनी तीसरे नंबर की बेटी पूजा को घोड़ी पर बैठाकर यह संदेश दिया है कि लड़के और लड़की में कोई अंतर नहीं होता है।
घुड़चढ़ी निकालती पूजा को देखते ही रह गए लोग।
दरअसल बेटी को घोड़ी पर बैठाकर उन्होंने उसे महसूस कराया कि वह भी बेटों से कम नहीं है। जैसे ही पूजा घोड़ी पर बैठी तो मौजूद रिश्तेदारों, सहेलियों और ग्रामीणों ने तालियां बजाकर उसका स्वागत किया।
दूल्हा रवि और दुल्हन पूजा।
दुल्हा बोला- गर्व महसूस कर रहा हूं
जब घोड़ी पर सवार होकर निकली दुल्हन पूजा निकली तो दूल्हा भी खुश दिखाई दिया। दिल्ली के मंगलापुरी निवासी दूल्हे रवि कुहार का कहना है कि पूजा ने समाज को बड़ा संदेश दिया है। पूजा के फैसले से वह स्वयं गर्व महसूस कर रहा है जिन्होंने एक कदम आगे बढ़ाते हुए सराहनीय फैसला लिया।
मैं बेटों और बेटियों में कोई अंतर नहीं समझता। इसलिए मैंने बेटी के सारे सपने पूरे किए। बेटी को शिक्षा के साथ-साथ कुश्ती के क्षेत्र में उतारा। मैंने उसे पढ़ाया-लिखाया और शादी के समय में भी एहसास कराया कि वह बेटों से कम नहीं है। चार पुत्रियां होने के बाद भी उनके हौसले बुलंद रखे। पूरी तरह से स्वतंत्र रखते हुए लड़कों के बराबर ही समझा है। -रमेश चंद, दुल्हन के पिता
दुल्हन के रूप में घोड़ी पर बैठ मुझे बेहद खुशी हुई। मैंने खुद को किसी परी से कम नहीं समझा। किसी भी मां-बाप को बेटा-बेटी में अंतर नहीं समझना चाहिए। कन्या भ्रूण हत्या जैसे अपराध नहीं करें। बेटियों को भी पढ़ाया लिखाया जाए। बेटियां भी बेटों से कम नहीं हैं। आज हर क्षेत्र में बड़े-बड़े मुकाम हासिल कर रही हैं। मैं झांसी की रानी, कल्पना चावला और किरण बेदी से बहुत प्रभावित हूं। -पूजा, दुल्हन, माजरी।