बादली। स्वीडिश कंपनी साब भारत में पहली बार कंधे से मार करने वाली हथियार प्रणाली कार्ल-गुस्ताफ एम-4 का निर्माण करेगी। बहादुरगढ़ के बादली स्थित दादरी तोए में कपंनी ने साढ़े 3.6 एकड़ जमीन पर इस कार्य का शिलान्यास किया है। कंपनी की ओर से अक्तूबर तक निर्माण शुरू करने का लक्ष्य है, जो रक्षा क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगा।
सब कुछ सही समय पर हुआ तो यह उपक्रम देश के रक्षा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का पहला मामला होगा। भारत आमतौर पर रक्षा क्षेत्र में 74 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति देता है, जिसमें 100 प्रतिशत एफडीआई केवल केस-दर-केस आधार पर स्वीकृत किया जाता है। साब एफएफवीओ भारतीय सशस्त्र बलों के लिए देश में नवीनतम रॉकेट लाॅन्चर का निर्माण करेगा, साथ ही विश्व भर में हथियार प्रणाली के उपयोगकर्ताओं के लिए घटकों का निर्माण भी होगा।
साब के बिजनेस एरिया डायनेमिक्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और प्रमुख गोरगेन जोहानसन ने कहा है कि कार्ल-गुस्ताफ के लिए स्वीडन के बाहर अपनी पहली सुविधा का निर्माण शुरू करने पर गर्व है। यह एक ऐसा उत्पाद है जिसका भारतीय सशस्त्र बलों के साथ एक लंबा इतिहास रहा है। उन्होंने शिलान्यास समारोह में बताया कि कंपनी उत्कृष्ट उत्पाद का उत्पादन शुरू करने के लिए पूरी तरह से उत्साहित है।
1500 मीटर क्षमता वाले एंटी आर्मर और रोशनी गोले का होगा निर्माण
कंपनी प्रवक्ता ने बताया कि 7 किलोग्राम वजन वाला एम4 जो एम3 से तीन किलो हल्का है। 1500 मीटर की क्षमता वाले एंटी आर्मर और रोशनी के गोले का निर्माण होगा। इसके अतिरिक्त रक्षा के क्षेत्र में अन्य उत्पादन भी किया जाएगा।
वर्जन-
-कंपनी ने निर्माण के लिए दादरी तोए मेट सिटी पर भरोसा जताया है, जो स्वीडन और भारत के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह दोनों देशों के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को भी मजबूती देगी। इससे पहले भी दादरी तोए में कई विदेशी कंपनियों ने भरोसा जताकर काम शुरू किया है।
-लोकेश कापसे, पीआरओ, रिलायंस मेट दादरी तोए।