बादली। ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का नारा देने वाले हरियाणा के कई गांव में जबरदस्त सकारात्मक परिणाम नजर आए हैं। जबकि कुछ गांवों में अभी भी चिंता का विषय बना है। गांव माजरी सहित कई गांवों में लिंगानुपात में बड़े पैमाने पर सुधार हुआ है। इसके अतिरिक्त बामडोला गांव के आंकड़े स्वास्थ्य विभाग को हैरान करने वाले हैं।
साल 2021 में एमपी माजरा गांव में 1000 लड़कों पर 2333 लड़कियों का सर्वोच्च लिंग अनुपात दर्ज किया गया, जबकि बामडोला में यह अनुपात 733 है जो सीएचसी बादली के कार्यक्षेत्र के गांवों में सबसे कम है। इसी प्रकार से एक हजार से अधिक के जन्मी पर लिंग अनुपात में माजरी, गुभाना, गंगड़वा और जरदकपुर गांव शामिल है। इसके अतिरिक्त बादली में 756, बुपनियां में 836, लाडपुर में 764, लुकसर में 785 दर्ज किया गया है। शाहपुर में एक हजार लड़कों पर बराबर लिंगानुपात रहा है।
2011 की जनगणना के अनुसार झज्जर जिले में शिशु लिंग अनुपात 800 से नीचे था। जिसके बाद विभाग ने कड़े कदम उठाए हैं। गांवों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व अधिकारियों ने जागरूकता संदेश दिए। 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ मुहिम की शुरुआत की थी। जिसके बाद सरकार ने कई कदम उठाए। सरकार ने अवैध अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर छापे मारे, एफआईआर दर्ज की, अपराधियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की गई है।
बीते साल अनधिकृत अल्ट्रासाउंड केंद्रों में छापे मारकर लिंग जांच के अवैध धंधे का संचालन करने वालों के विरुद्ध पीसी-पीएनडीटी और एमटीपी अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दिल्ली और नोएडा में भी विभिन्न हिस्सों में छापे मारकर ऐसे रैकेटों का भंडाफोड़ किया है। इसके अलावा, अवैध रूप से प्रयोग की जा रही पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीनों को कब्जे में लिया गया। इसी का परिणाम है कि लिंगानुपात में सुधार हुआ है। गांवों में अभी जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
- डॉ. रणबीर, नोडल अधिकारी, पीएनडीटी झज्जर