कोच हितेश देशवाल के साथ सागर अहलावत। भारतीय दल के साथ सागर अहलावत।
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कोरोना काल में भी अभ्यास नहीं छोड़ा
कोरोना काल के दौरान जब कैंप बंद हुए तो कोच हितेश देशवाल ने सागर को अकेले भी प्रेक्टिस कराई। कॉमनवेल्थ गेम्स के ट्रायल में सागर ने शानदार प्रदर्शन किया और उसने पहले ट्रायल में ओलंपिक 2020 प्रतिभागी सतीश कुमार को हराया, फिर फाइनल में नरेंद्र को मात दी। सागर के प्रदर्शन की बदौलत उसका चयन 28 जुलाई से 8 अगस्त तक इंग्लैंड के बर्मिंघम आयोजित होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में हो गया।
सागर अहलावत कोच हितेश देशवाल के साथ।
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परिजनों को भरोसा देश का मान बढ़ाएगा उनका बेटा
सागर के पिता राजेश अहलावत एक किसान हैं और गांव में जमीन लेकर खेती करते हैं। उन्होंने बेटे को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए काफी संघर्ष किया है। उसकी माता मुकेश गृहिणी है और उसकी एक बहन है।
सागर के कोच हितेश देशवाल ने बताया कि सागर की फिटनेस और लंबाई अच्छी है। इसे देखते हुए उन्होंने 4 साल पहले मुक्केबाज सीखने के लिए कहा था। सागर ने उनकी बात मानीं और मुक्केबाजी सीखनी शुरू कर दी। उस वक्त उसकी उम्र 18 साल थी। सागर के पंच काफी मजबूत थे। लंबाई का वह फायदा उठाता था।
उन्हें लगने लगा था कि मुक्केबाजी में सागर एक दिन बुलंदियों तक पहुंचेगा। उसने पूरी मेहनत की। कम समय में सागर ने जबरदस्त प्रदर्शन किया और चंडीगढ़ चैंपियन बना। उसके बाद लगातार दो बार ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियन बना और दो बार खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियन बना। इसके साथ ही राष्ट्रीय मुक्केबाजी में पदक जीता। इसके बाद उसका देश की टीम के लिए चले कैंप में चयन हो गया।