बहादुरगढ़। टीकरी बॉर्डर पर चल रहा किसानों का आंदोलन बुधवार को 71वें दिन में प्रवेश कर गया। इस दिन टीकरी बॉर्डर पर मंच हरियाणा की किसान महिलाओं ने संभाला और हरियाणवी गीतों के माध्यम से केंद्र सरकार को जमकर कोसा। अब लगातार किसान 6 फरवरी को भारत बंद और रेलवे ट्रैक जाम करने को लेकर रणनीति बना रहे हैं। अब आंदोलन में हरियाणा के किसानों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। वहीं किसानों नेताओं ने एक सात सदस्यीय टीम गिरफ्तार किए गए किसानों की पैरवी के लिए बनाई गई है। इसमें हरियाणा और पंजाब की यूनियनों के नेता शामिल हैं।
किसानों के साथ अन्याय कर रही है सरकार
भारतीय किसान संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष विकास सीसर ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार लगातार आंदोलनरत किसानों के साथ अन्याय करने का काम कर रही है। आंदोलन को फेल करने की कोशिश की जा रही है। किसानों द्वारा जहां पर आंदोलन किया जा रहा है, वहीं पर बिजली और पानी की सप्लाई बंद कर दी गई है। इंटरनेट कई दिनों से बंद किया हुआ है। सफाई शौचालय की व्यवस्था भी ठप्प पड़ी है। इसके लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया जाता है तो वे फोन नहीं उठा रहे हैं। इससे किसानों में रोष बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन किसानों के ट्रैक्टर नहीं मिल रहे हैं उनके बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। सीसर ने बताया कि गत दिवस वे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से भी मिले हैं। उन्होंने बताया कि गृह मंत्रालय की ओर से 115 लोगों की लिस्ट दी गई है जो जेलों में बंद हैं। जबकि अन्य काफी संख्या में किसान लापता हैं उनका अभी कोई पता नहीं चल रहा है। इसको लेकर भी अधिकारियों के साथ बातचीत की जा रही है।
7 सदस्यीय टीम में ये नेता शामिल
26 जनवरी को दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान गिरफ्तार किए गए किसानों को रिहा करवाने के लिए किसानों ने रणनीति बनाई है। इसके लिए सात सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी गिरफ्तार हुए किसानों की पैरवी करने का काम करेगी। इसमें भारतीय किसान सघंर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष विकास सीसर, राजेंद्र सिंह पजांब, कामरेड इंद्रजीत, जोगेंद्र उग्राहां, कर्णजीता सिंह वकील, हरपाल, प्रेम सिंह भंगु (कमेटी कनवीनर) को चुना गया। यह टीम लगातार किसानों के बचाव के लिए काम करेगी।
टीकरी बॉर्डर पर बढ़ रही है महिलाओं की संख्या
71 दिनों से किसानों का आंदोलन चल रहा है। 26 जनवरी के बाद आंदोलन ने करवट ली। आंदोलन में हरियाणा के अलग-अलग जिलों से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सवार होकर किसान पहुंच रहे हैं। इनमें न केवल बुजुर्ग, युवा बल्कि महिलाएं भी काफी संख्या में शामिल हैं। बुधवार को हरियाणा की ग्रामीण महिलाओं ने टीकरी बॉर्डर पर मंच के माध्यम से केंद्र सरकार से तीनों कानूनों को जल्द निरस्त करने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसान अपने घरों की वापसी तभी करेगा, जब तीनों कानून खत्म किए जाएंगे। अन्यथा वह इसी तरह सड़कों पर जमा रहेगा। उन्होंने मांग की कि सरकार को किसानों व आमजन के हितों को ध्यान में रखते हुए उक्त कानून तुरंत निरस्त करना चाहिए। इसको लेकर कोई हठधर्मिता नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपना आंदोलन चला रहे हैं, लेकिन सरकार के इशारे पर मामले को तूल देने का कार्य हो रहा है।