झज्जर। सड़कों पर खड़े रहने वाले ओवरलोड वाहन दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। इन दुर्घटनाओं में कई लोगों की जान जा चुकी है तो कई लोग घायल हुए हैं, लेकिन पुलिस प्रशासन या आरटीए विभाग की तरफ से इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। रात को ही नहीं, दिन के समय भी ये वाहन नो एंट्री के चक्कर में सड़कों पर या सड़कों के किनारे खड़े रहते हैं।
जिले में अनेक बार इन भारी वाहनों के कारण हादसे हो चुके हैं, लेकिन संबंधित विभाग इस प्रकार के हादसों से कोई सबक नहीं ले रहा है। अगर कोई इस प्रकार का हादसा होता है तो पुलिस प्रशासन की तरफ से केवल उस वाहन चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई की जाती है, लेकिन भविष्य में इस प्रकार से खड़े वाहनों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
अगर पुलिस प्रशासन की तरफ से इस प्रकार सड़क पर खड़े रहने वाले वाहनों के चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और इन्हें सड़कों से हटवा दिया जाए तो सड़क दुर्घटनाओं में कमी आ सकती है। चरखी दादरी व नारनौल की तरफ से रोड़ी व क्रशर से भरे ओवरलोड ट्रक व डंपर दिल्ली व गुड़गांव की तरफ से जाते हैं। कई बार चेकिंग के दौरान भारी वाहन चालक अपनी गाड़ियों को सड़क के किनारे खड़ा करके चेकिंग से बचते नजर आते हैं। कई घंटों तक ट्रकों की लंबी लाइन सड़क के किनारे लगी रहती है। इसके कारण पीछे से आने वाले तेज रफ्तार वाहन खड़े वाहन से टकरा जाते हैं।
हो चुके हैं कई हादसे
अक्तूबर में केएमपी पर एक कार को पीछे से दूसरी कार ने टक्कर मार दी थी। इस हादसे में एक ही परिवार के आठ सदस्यों की मौत हो गई थी। वहीं दिसंबर में जिले के गांव डीघल के बाईपास पर खड़े एक ट्रक को पीछे से तेज गति से आए ट्रक ने टक्कर मार दी। हादसा इतना जबरदस्त था कि ट्रक की चपेट में आए दो ट्रक चालकों की गंभीर चोटों के चलते मौत हो गई थी। सोमवार की शाम को नेशनल हाईवे 334 बी पर सड़क पर खड़े टैंकर में स्कूल वैन ने टक्कर मार दी। जिसमें दो बच्चे व वैन के परिचालक की मौत हो गई।
तीन नेशनल हाईवे व एक एक्सप्रेस वे गुजरते हैं जिले से
जिले में करीब 1400 किलोमीटर की सड़कें हैं। इनमें तीन नेशनल हाईवे भी शामिल हैं। जिला मुख्यालय को जोड़ने वाली मुख्य सड़कों की हालत अच्छी होने के कारण वाहन भी सरपट दौड़ते नजर आते हैं। सड़कों पर तेज गति से दौड़ने वाले वाहनों की वजह से सड़क दुर्घटनाएं भी लगातार बढ़ रही हैं। देखा जाए तो लापरवाही व ओवरलोड वाहन के कारण हो रहे सड़क हादसों में हर साल सैकड़ों लोग अकाल मौत के आगोश में समा जाते हैं। 80 फीसदी सड़क दुर्घटनाएं भारी व ओवरलोड वाहनों के कारण हो रही हैं। इसी प्रकार मुख्य मार्गों पर होटल और ढाबों के आगे भी भारी वाहन रात के समय खड़े रहते हैं।
वर्जन
भारी वाहनों के चालान आरटीए विभाग की तरफ से किए जाते हैं। पुलिस की तरफ से अन्य वाहनों के चालान किए जाते हैं। शहर के आसपास की सड़कों पर होटल व ढाबों के सामने खड़े वाहनों को हटवाया जाएगा।
- दिलावर सिंह, शहर यातायात पुलिस प्रभारी, झज्जर।