फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

26 को किसान आंदोलन के एक वर्ष पूरा होने पर किसान नेता कर रहे डोर टू डोर दौरा

विज्ञापन
विज्ञापन
कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमा पर पिछले एक वर्ष से डटे किसानों के आंदोलन को 26 नवंबर को एक साल पूरा हो रहा है। इस दिन बार्डर पर आंदोलन को लेकर अपनी ज्यादा तादाद दिखाने के लिए किसान संगठन लगातार जनसंपर्क कर रहे हैं। इस दौरान किसानों से एकजुटता दिखाने की अपील करते हुए बार्डर पर पहुंचने की अपील की जा रही है।
विज्ञापन

अखिल भारतीय किसान सभा के जिला प्रधान जयप्रकाश बेनीवाल, सचिव रामचंद्र यादव और रिटायर्ड कर्मचारी संघ के ब्लॉक झज्जर के प्रधान मास्टर बलबीर सिंह यादव का एक जत्था पिछले 2 दिनों से जिले के गांवों में दौरा करके किसानों को 26 नवंबर को ज्यादा से ज्यादा संख्या में ढांसा बॉर्डर किसान धरने पर पहुंचने का आह्वान कर रहा है। किसानों की यह टीम बिरोहड़ 12 के प्रधान कपूर सिंह, सेहलंगा के पूर्व सरपंच सुमेर सिंह, साल्हावास तपा के प्रधान रणवीर सिंह, लडायन गांव के सरपंच सुनील जाखड़, खातीवास गांव में लक्ष्मण नंबरदार आदि से मिलकर सभी से अपील करते हुए कहा कि 26 नवंबर को किसान आंदोलन का एक साल पूरा हो रहा है। इसलिए संयुक्त किसान मोर्चा ने यह फैसला लिया है कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में 26 नवंबर को देश भर में चल रहे सभी धरनों पर भारी संख्या में पहुंचे।
संयुक्त किसान मोर्चा हरियाणा में पैदल मार्च भी निकालेगा। यह पैदल मार्च 29 नवंबर को पार्लियामेंट पर पहुंचेगा। 29 नवंबर से देश की संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है इसलिए पूरे जोर-शोर के साथ यह मांग उठाई जाएगी कि चालू संसद सत्र में तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया जाए और किसान की उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गारंटी का कानून बनाया जाए।
विज्ञापन

अखिल भारतीय किसान सभा के जिला सचिव रामचंद्र यादव ने बताया कि पूरे जिले के अंदर आने वाले दिनों में सभी किसानों को ढांसा बॉर्डर पहुंचने के लिए कहां जाएगा। किसानों के अंदर काफी उत्साह है और बड़ी संख्या में किसान 26 नवंबर को दासा बॉर्डर पहुंचेंगे। किसानों में डीएपी की खरीद को लेकर भी असंतोष बना हुआ है। आज जब किसान को डीएपी खाद की सबसे ज्यादा जरूरत है। सरकार खाद नहीं दे रही है। रात भर किसान डीएपी खाद के लिए लाइनों में लगा रहता है। सरकार ने बाजरा की खरीद भी नहीं की। इसलिए सभी किसान इस बात को समझने लगे हैं कि यह कृषि कानून किसान विरोधी है इन तीनों को कानूनों का वापस करवाना अत्यंत जरूरी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें