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रोडवेज में अब छतों पर सामान रखने की सुविधा नहीं

Fri, 22 Jan 2016 01:15 AM IST
ब्ययूराो/अमर उजाला / झज्जजर
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रोडवेज बसों की छत पर सामान रखने की सुविधा अब यात्रियों को नहीं मिलेगी। नई बसों की छतों पर तो जाल लगवाने के मामले में रोडवेज पीछे हट ही चुका है, वहीं अब पुरानी बसों से भी जाल हटाने की तैयारी है, जिनमें ये सुविधा वर्षों से चली आ रही है। बात झज्जर की करें तो अगले कुछ महीनों में यहां 62 बसों की छतों से जाल हटा कर उनको बिना जाल वाली छत के ही विभिन्न रूटों पर दौड़ाया जाएगा। पिछले दिनों नए बस स्टैंड के निरीक्षण को आए रोडवेज के डीजी आरसी बिधान इसकी पुष्टि कर चुके हैं।
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रोडवेज ने हादसों को रोकने के लिए जो नीति अपनाई है, उससे अब रोडवेज की बसों से जल्द ही छत का कैरियर (सामान रखने वाला लोहे का जाल) गायब हो जाएगा। इससे बस की छत पर बैठकर यात्रा करने वालों से भी छुटकारा मिलेगा। रोडवेज का मानना है कि इससे हादसों में कमी आएगी। असल में ऐसा करके रोडवेज ने आम आदमी की सुविधाओं में कटौती की है। नई बसों में छत न होने से लोगों को सामान रखने में परेशानी होगी। जिससे बस के अंदर भीड़ बढ़ेगी। वैसे तो विभाग ने इन बसों को लोकल सर्विस के लिए सड़कों पर उतारा है, लेकिन बसें थ्री बाई टू सीटर होने की वजह से उन्हें लंबे रूट पर लगाने के भी कयास लगाए जा रहे हैं।
डिग्गी की नहीं कोई व्यवस्था
रोडवेज ने नई बसों में छतों से जाल तो गायब कर दिया, लेकिन सामान रखने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की। हरियाणा गौरव की तर्ज पर बसों में डिग्गी का प्रबंध किया जा सकता था। जिससे दोनों ही समस्याओं का हल हो सकता है। न तो यात्रियों द्वारा छत पर सफर करने की परेशानी रहेगी और न ही सामान की कोई दिक्कत, लेकिन नई बसों में ऐसा नहीं किया गया है। अब पुरानी रोडवेज बसों से भी छत के जाल को हटाया जाता है तो यात्रियों की समस्या बढ़ जाएगी। इनमें से कुछ बसें तो लंबे रूटों पर चल रही हैं। इनमें यात्रियों को सामान रखने में परेशानी होगी।
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बसें बढ़ने से ही खत्म होंगी समस्याएं
रोडवेज वर्कर्स यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष हरिनारायण शर्मा का कहना है कि रोडवेज की असली समस्या बसों की कमी है। यदि रोडवेज के बेड़े में बसों की संख्या बढ़ जाए तो बसों की छत गायब करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। बसों में हादसे तभी रुक सकेंगे जब चालकों की भर्ती होगी और बसों की तादात बढ़ेगी। उन्होंने माना कि नई बसों में छत को हटाया गया है, लेकिन उन्होंने कहा कि इसके लिए विभाग बसों में डिग्गी की व्यवस्था कर सकता था। जिससे सामान रखने की समस्या खत्म हो जाएगी।
डिपो में 10 बसें उतरीं सड़कों पर
रोडवेज के झज्जर डिपो में बिना छत की 10 बसें सड़क पर उतर चुकी हैं, जोकि अभी विभिन्न रूट पर चल रही हैं। डिपो में अभी करीब 160 बसें चल रही हैं, नियमों के अनुसार 200 बसें डिपो में होना आवश्यक हैं। चालकों की कमी के कारण अभी बसें पूरी नहीं हैं, लेकिन चालकों की भर्ती होते ही बिना छत के 40 नईं बसें आईं तो सामान रखने की समस्या खल सकती है। दूसरी तरफ विभाग पुरानी बसों से भी छत के जाल को उतारने की तैयारी में है।

रोडवेज अपनी बसों से छत के जाल को पूरी तरह से खत्म कर रहा है। यात्री बसों की छतों पर चढ़ते हैं, जिससे कि हादसे होते रहते हैं। व्यवसायिक सामान के लिए रोडवेज का प्रयोग बहुत कम है, ऐसे में किसी प्रकार की समस्या नहीं आने वाली। कुछ एक यात्री सामान लाते हैं, जो कि छत पर रखने की बजाय अंदर रखना पसंद करते हैं। पुरानी बसों से भी छत के जाल को हटाने की प्रक्रिया चल रही है।
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-जगबीर सिंह, एसएमई रोडवेज।
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