बंदर छोड़ऩे वाली टीम को बीती रात राजस्थान पुलिस ने गोतस्कर समझकर धुन डाला। गाड़ी के ड्राईवर को गंभीर चोट आने के कारण अस्पताल में दाखिल कराया गया है। सूचना के बाद पार्षदों का दल राजस्थान पुलिस के पास पहुंचा और आरोपी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की, लेकिन वहां के पुलिस अधिकारियों ने अपने सिपाहियों को दोषी मानने से इंकार कर दिया।
ये है मामला
बेरी में एक सप्ताह सें बंदर पकड़ने का काम चल रहा है। जिसकी अनुमति नगरपालिका बेरी ने विभाग से फिरोजपुर झीरका के जंगलों में छोड़ने की ले रखी है। नगरपालिका स्टाफ का एक सदस्य बंदर पकड़ने वाली टीम रोजाना इन्हें फिरोजपुर झिरका के जंगलों मे छोड़ने जाती है। रोजाना की तरह टीम पिकअप गाड़ी में बंदर को छोड़कर राजस्थान के रास्ते लौट रही थी। रात साढ़े दस बजे गेलपुर चौकी जिला अलवर के अंतर्गत दो लोगों ने गाड़ी को हाथ देकर रुकवाया। दोनों में से कोई भी पुलिस की ड्रेस में नहीं था। गाड़ी चालक ने सोचा रात के अंधेरे में गाड़ी लूटने वाले हैैं तो उसने गाड़ी भगा ली। इसी दौरान दोनों ने ईंट मारकर गाड़ी का अगला शीशा फोड़ दिया।
पहले पीटा, कागज देखा तो बोले भाग जाओ
घबराए चालक ने गाड़ी को तेज भगा लिया। कुछ दूरी पर टपूकड़ा थाने के पुलिकर्मी नाका लगाकर वाहनों की चेकिंग कर रह थे। टपूकड़ा नाके पर करीब दर्जन भर पुलिसकर्मियों ने गाड़ी चालक अशोक को रोक लिया और डंडों से पीटना शुरू कर दिया। चालक अशोक ने बताया कि बेरी से बंदर को छोड़ने के लिए फिरोजपुर झीरका गए थे। जिसकी उनके पास अनुमति भी है। जिसे बाद में पुलिसकर्मी ने पढ़कर कहा कि जाओ यहां से भाग जाओ, वरना केस बनाकर अंदर कर देंगे। पुलिस की पिटाई में गाड़ी चालक अशोक, नगरपालिका का चपरासी दानवीर और बंदर पकड़ने वाली टीम का सदस्य रसीद खान घायल हुए। गाड़ी चालक अशोक को ज्यादा चोटें आईं हैं और हालत गंभीर बनी हुई है। उसे अस्पताल में दाखिल कराया गया है।
पुलिसकर्मी बोले, गोतस्कर समझ हुई भूल
पुलिसकर्मियों की पीटाई के बाद जब चालक अशोक व टीम के सदस्यों ने उनसे पूछा कि उन्हें बेकसूर क्यों पीटा गया तो पुसिकर्मियों ने कहा कि उन्होंने सोचा कि तुम गोतस्कर हो। घटना के बाद चालक ने इसकी सूचना नगरपालिका चेयरमैन को दी। सूचना पाकर नगरपालिका चेयरमैन के प्रतिनिधि भोला कस्बे के षार्षदों व अन्य लोगों को साथ लेकर गैलपुर चौकी और टपूकड़ा थाने के थाना प्रभारी से मिले और पुलिसकर्मियों के खिलाफ कारवाई करने की मांग की, लेकिन थाना प्रभारी ने अपने पुलिसकर्मियों को क्लीन चिट दी और कोई मामला दर्ज करने से मना कर दिया।