उप-अधीक्षक के मुताबिक 11 अगस्त 1998 को सुबह करीब झज्जर के गांव सिलाना की बनी में एक व्यक्ति की लाश पड़ी मिली थी। गांव का रहने वाला संजय उर्फ टोनी अपने पशुओं को चराने के लिए बणी में लेकर गया था। वहां पर संजय ने करीब 25/30 साल के एक नौजवान की लाश पड़ी देखकर चौकीदार साधुराम को बताया और फिर झज्जर जिला पुलिस को इसकी सूचना दी गई। पुलिस ने मौका मुआयना कर पाया कि अंगोछे (परने) से गला घोंटकर उक्त नौजवान की हत्या की गई है।
चौकीदार साधुराम के बयान पर हत्या का मुकद्दमा दर्ज कर पुलिस ने तेजी से छानबीन कर पता लगाया कि जिस नौजवान की हत्या की गई है वह बदायूं क्षेत्र के विजय नगला गांव का रहने वाला महेन्द्र सिंह था। महेन्द्र सिंह सोनीपत के हरसाना कलां गांव स्थित एक मशरूम फार्म पर काम करता था। जांच के दौरान पुलिस ने पता लगाया कि हरसाना कलां में ही उसके गांव के रहने वाले चार अन्य लोग जयराम वा अमर सिंह पुत्रान गोकलराम तथा सुखराज पुत्र हरसाये और वीरपाल पुत्र कृपाल सिंह भी मशरूम फार्म पर ही काम करते थे।
उपरोक्त चारों को संदेह के दायरे में रखते हुए पुलिस ने उनकी धरपकड़ शुरू की लेकिन सभी अंडरग्राउंड हो चुके थे। करीब 6 महीने की कड़ी मेहनत के बाद आखिरकार झज्जर पुलिस ने जयराम और उसके भाई अमर सिंह को गिरफ्तार कर लिया लेकिन सुखराज व वीरपाल तमाम प्रयासों के बावजूद पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ पाए। धीरे - धीरे वक्त गुजरता रहा और पुलिस के प्रयास भी चलते रहे लेकिन उन दोनों का कोई सुराग नहीं लग पाया। आखिरकार रोहतक पुलिस रेंज के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक की ओर से उपरोक्त दोनों आरोपियों पर 5 - 5 हजार रुपए का ईनाम भी घोषित कर दिया गया लेकिन उनका कोई सुराग नहीं चल सका।
आरोपियों से पूछताछ में पता लगा कि महेंद्र का इसलिए कत्ल किया गया था, क्योंकि वह शराब पीने का आदी था और जब वे लोग सोनीपत के हरसाना कलां गांव में मशरूम फार्म पर रहते थे तो महेंद्र अक्सर उन लोगों के साथ शराब के नशे में मारपीट करता था, जिससे वह सभी तंग आ गए थे और उन्होंने योजना बनाकर महेंद्र को बहाने से झज्जर के सिलाना गांव की बणी में ले गए और वहां पर अंगोछे से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी थी। अमर सिंह और जयराम पहले झज्जर जिले में काम करके गए हुए थे इसलिए वह सिलाना इलाके से अच्छी तरह से वाकिफ भी थे।
महेंद्र सिंह के कत्ल के बाद सभी लोग अलग-अलग जगह पर अंडरग्राउंड हो गए थे जिनमें से अमरपाल व जयराम को तो पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया गया था लेकिन वीरपाल और सुखराज गिरफ्तारी से बचे रहे। फिलहाल, वीरपाल करीब 8 साल से पंजाब के होशियारपुर में एक पापुलर की नर्सरी पर काम करता था और सुखराज करीब 4 साल से गुरुग्राम के न्यू पालम विहार की एक सोसाइटी में माली का काम कर रहा था।