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झज्जर के महेंद्र को मिला न्याय: वर्ष 1998 में हुई थी हत्या; CIA ने दोनों हत्यारोपी को किया काबू, पढ़ें रिपोर्ट

Mon, 01 Jan 2024 03:28 PM IST
नवीन दलाल संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर (हरियाणा)

सार

झज्जर पुलिस ने 25 वर्ष पुराने केस में आरोपियों को पकड़ने में सफलता हासिल की। उप-अधीक्षक के मुताबिक 11 अगस्त 1998 को सुबह करीब झज्जर के गांव सिलाना की बनी में एक व्यक्ति की लाश पड़ी मिली थी। गांव का रहने वाला संजय उर्फ टोनी अपने पशुओं को चराने के लिए बणी में लेकर गया था।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पुरानी कहावत है कि "गुनाह के निशान कभी मिटाए नहीं मिटते", अपराधी लाख शातिर हो उसे अपने जुर्म की सजा भुगतने जेल तो जाना ही पड़ेगा। झज्जर जिले में आज से करीब 25 साल पहले हुए कत्ल के एक मामले में यह कहावत एकदम सटीक साबित हो रही है क्योंकि सीआईए टू बहादुरगढ़ ने 25 साल से कानून की आंखों में धूल झोंकते चले आ रहे दो हत्या आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचाया है।

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जिस संबंध में जानकारी देते हुए सोमवार को पुलिस उपाधीक्षक शमशेर सिंह ने पत्रकारों से रूबरू होते हुए बताया कि बहादुरगढ़ सीआईए दो के इंस्पेक्टर विवेक मलिक की टीम ने पंजाब के होशियारपुर क्षेत्र से वीरपाल पुत्र कृपाल सिंह और गुरुग्राम क्षेत्र से सुखराज पुत्र हरसाये निवासीगण विजय नगला बदायूं को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करके बहादुरगढ़ लाया गया है और आज अदालत में पेश करके न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
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उप पुलिस अधीक्षक शमशेर सिंह ने बताया कि उपरोक्त दोनों ने अपने दो अन्य साथियों के साथ मिलकर आज से करीब 25 साल पहले 1998 में झज्जर के गांव सिलाना में अपने ही गांव के महेंद्र सिंह नाम के व्यक्ति का कत्ल किया था और उसके बाद से यह लोग अंडरग्राउंड चल रहे थे। पुलिस अधीक्षक डॉ अर्पित जैन ने करीब महीना भर पहले उपरोक्त आरोपियों को गिरफ्तार करने का जिम्मा बहादुरगढ़ सीआईए दो के इंस्पेक्टर विवेक मलिक की टीम को सौंपा था। इंस्पेक्टर मलिक की टीम ने पूरे मामले की शुरू से गहराई में जाकर पड़ताल की और तेजी से सूचनाएं एकत्रित करते हुए एक साथ अलग-अलग टीमें बनाकर छापामारी करते हुए आरोपी वीरपाल को होशियारपुर पंजाब और सुखराज को गुरुग्राम क्षेत्र से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है।

यूं अंजाम दी गई थी महेन्द्र हत्याकांड की वारदात

उप-अधीक्षक के मुताबिक 11 अगस्त 1998 को सुबह करीब झज्जर के गांव सिलाना की बनी में एक व्यक्ति की लाश पड़ी मिली थी। गांव का रहने वाला संजय उर्फ टोनी अपने पशुओं को चराने के लिए बणी में लेकर गया था। वहां पर संजय ने करीब 25/30 साल के एक नौजवान की लाश पड़ी देखकर चौकीदार साधुराम को बताया और फिर झज्जर जिला पुलिस को इसकी सूचना दी गई। पुलिस ने मौका मुआयना कर पाया कि अंगोछे (परने) से गला घोंटकर उक्त नौजवान की हत्या की गई है।

चौकीदार साधुराम के बयान पर हत्या का मुकद्दमा दर्ज कर पुलिस ने तेजी से छानबीन कर पता लगाया कि जिस नौजवान की हत्या की गई है वह बदायूं क्षेत्र के विजय नगला गांव का रहने वाला महेन्द्र सिंह था। महेन्द्र सिंह सोनीपत के हरसाना कलां गांव स्थित एक मशरूम फार्म पर काम करता था। जांच के दौरान पुलिस ने पता लगाया कि हरसाना कलां में ही उसके गांव के रहने वाले चार अन्य लोग जयराम वा अमर सिंह पुत्रान गोकलराम तथा सुखराज पुत्र हरसाये और वीरपाल पुत्र कृपाल सिंह भी मशरूम फार्म पर ही काम करते थे।

उपरोक्त चारों को संदेह के दायरे में रखते हुए पुलिस ने उनकी धरपकड़ शुरू की लेकिन सभी अंडरग्राउंड हो चुके थे। करीब 6 महीने की कड़ी मेहनत के बाद आखिरकार झज्जर पुलिस ने जयराम और उसके भाई अमर सिंह को गिरफ्तार कर लिया लेकिन सुखराज व वीरपाल तमाम प्रयासों के बावजूद पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ पाए। धीरे - धीरे वक्त गुजरता रहा और पुलिस के प्रयास भी चलते रहे लेकिन उन दोनों का कोई सुराग नहीं लग पाया। आखिरकार रोहतक पुलिस रेंज के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक की ओर से उपरोक्त दोनों आरोपियों पर 5 - 5 हजार रुपए का ईनाम भी घोषित कर दिया गया लेकिन उनका कोई सुराग नहीं चल सका।

शराब पीकर मारपीट करता था महेंद्र

आरोपियों से पूछताछ में पता लगा कि महेंद्र का इसलिए कत्ल किया गया था, क्योंकि वह शराब पीने का आदी था और जब वे लोग सोनीपत के हरसाना कलां गांव में मशरूम फार्म पर रहते थे तो महेंद्र अक्सर उन लोगों के साथ शराब के नशे में मारपीट करता था, जिससे वह सभी तंग आ गए थे और उन्होंने योजना बनाकर महेंद्र को बहाने से झज्जर के सिलाना गांव की बणी में ले गए और वहां पर अंगोछे से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी थी। अमर सिंह और जयराम पहले झज्जर जिले में काम करके गए हुए थे इसलिए वह सिलाना इलाके से अच्छी तरह से वाकिफ भी थे।
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इस तरह से बचे रहे गिरफ्तारी से

महेंद्र सिंह के कत्ल के बाद सभी लोग अलग-अलग जगह पर अंडरग्राउंड हो गए थे जिनमें से अमरपाल व जयराम को तो  पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया गया था लेकिन वीरपाल और सुखराज गिरफ्तारी से बचे रहे। फिलहाल, वीरपाल करीब 8 साल से पंजाब के होशियारपुर में एक पापुलर की नर्सरी पर काम करता था और सुखराज करीब 4 साल से गुरुग्राम के न्यू पालम विहार की एक सोसाइटी में माली का काम कर रहा था।
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