मेट्रो यात्रियों को सोमवार से राहत मिल रही है। अब यात्री सभी सीटों पर बैठकर सफर कर सकते हैं, जबकि खड़े होकर सफर करने पर अभी रोक रहेगी। मेट्रो के एक डिब्बे में करीब 50 सीटें होती हैं और खड़े होकर चलने वाले यात्रियों को मिलाकर एक डिब्बे में लगभग 250 यात्री सफर कर सकते हैं। इस तरह डिब्बे के हिसाब से सफर करने वालों की संख्या अब भी 20 लगभग फीसदी ही रहेगी।
दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के आदेश के अनुसार रविवार तक मेट्रो में केवल आधी सीटों पर बैठकर ही यात्री सफर कर सकते थे। खड़े होकर यात्रा करने की अनुमति नहीं थी। सीटिंग क्षमता फुल करने की अनुमति के बावजूद खड़े होकर सफर करने की अनुमति नहीं दी गई है।
दरअसल, मेट्रो को अधिक क्षमता के साथ चलाने की अनुमति न होने के कारण यात्रियों का परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। यात्री पूरी सीटिंग की छूट मांग रहे थे। खुद डीएमआरसी ने भी दिल्ली सरकार और प्राधिकरण से सभी सीटों पर यात्री बैठाने की अनुमति मांगी थी। इसलिए दिल्ली के परिवहन मंत्री नजफगढ़ के विधायक कैलाश गहलोत ने प्राधिकरण को पत्र लिखकर सभी सीटों पर यात्री बैठाने की अनुमति देने की मांग की थी। शनिवार को प्राधिकरण ने मेट्रो रेल और दिल्ली परिवहन निगम व कलस्टर बसों में भी सभी सीटों पर यात्री बैठाने की अनुमति दे दी है। मगर अभी यात्रियों को डिब्बे में खड़े होकर सफर करने की छूट नहीं दी गई है। दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा छूट दिए जाने से यात्रियों को कुछ राहत तो मिली है, लेकिन सुविधाएं इससे भी सामान्य नहीं हो पाएंगी।
एक मेट्रो अधिकारी ने कहा कि कोविड-19 के दौर से पहले मेट्रो के एक कोच में औसतन 200 यात्री सफर करते थे। इसके बावजूद कुछ लोग सुविधाओं का अभाव मानते थे। तो अब केवल 20 फीसदी की अनुमति से कैसे काम चलेगा।