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एम्स में नौकरी के नाम पर पैसे लेने के मामले हो रहे उजागर

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बाढ़सा स्थित एम्स-2 में निजी कंपनी के तहत नौकरी लगवाने के लिए पैसे लेने के मामले उजागर हो रहे हैं। कुछ कर्मचारियों ने एक राजनीतिक व्यक्ति सहित बाढ़सा के ही दो अन्य लोगों पर पैसे लेने की शिकायत पुलिस में दर्ज करवा रखी है। वहीं, एम्स के बाहर सड़क पर धरना और प्रदर्शन भी कर रहे हैं।
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एम्स-टू में निजी कंपनी के अधीन कार्यरत कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का मामला भ्रष्टाचार के मामले में तब्दील हो गया है। कर्मचारियों ने बाढ़सा गांव के तीन लोगों पर नौकरी के पर पैसे लेने के आरोप लगाकर जांच की मांग की है। कर्मचारियों ने फैसला लिया है कि जांच पूरी होने तक यहीं बैठेंगे। नौकरी से निकाले गए कर्मचारियों में मनीष, जोगेंद्र, मोनिका, आरती, रवि, राहुल, दीपक, सचिन, आशीष और कृष्ण ने बताया कि वे बीईसीआईएल कंपनी के तहत एमटीएस, डाटा आपरेटर और फिजियोथैरेपी का काम करते थे। कोरोना काल के दौरान तीन माह नियमित तौर पर काम किया, पर पहली अगस्त को बिना किसी नोटिस के उन्हें नौकरी से निकाल दिया है। जिसके चलते उनके सामने परिवार के लिए रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। एम्स के बाहर धरने पर बैठे कर्मचारियों में 120 एमटीएस, 24 डीओ और 7 फिजियोथैरेपिस्ट हैं। कर्मचारियों ने बताया कि बिना किसी विज्ञापन के ही दलालों की मार्फत उन्हें नौकरी दी गई। दलालों ने 70 हजार से एक लाख रुपये लेकर उन्हें नौकरी दिलवाई। उन्हें शुरू में स्थायी नौकरी की बात कहकर बहकाया गया जबकि अब तीन माह की बात कहकर नौकरी से निकाल दिया गया है।
वहीं, बाढ़सा पुलिस चौकी प्रभारी मुनेश देवी का कहना है कि शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है। युवाओं ने पैसे के बदले नौकरी देने के आरोप कुछ लोगों पर लगाए है जिसकी जांच की जा रही है।
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आरोप बताए निराधार
बीईसीआईएल की ओर से मैनेजर महेश चंद का कहना है कि कर्मचारियों को मात्र तीन माह की नौकरी पर रखा गया था। यह बात सभी कर्मचारियों को बताई गई थी। अब कर्मचारी काम को आगे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं तो बातचीत भी की जाएगी। नौकरी के नाम पर पैसे लेने के आरोप गलत हैं। अगर किसी ने पैसे लिए हैं तो उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई जाएगी।
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