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रोहतक लोकसभा सीट पर हार का असर: झज्जर में BJP की बैठक में जमकर हंगामा, नेताओं के खिलाफ कार्यकर्ताओं में गुस्सा

Sun, 09 Jun 2024 03:36 PM IST
नवीन दलाल संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर (हरियाणा)

सार

झज्जर में भाजपा की बैठक में जमकर हंगामा हुआ और कार्यकर्ताओं के बीच बहस हुई। बैठक में पूर्व सांसद डॉ. अरविंद शर्मा ने सरकार के नेतृत्व पर ही सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार के नेतृत्व का अधिकारियों पर कोई लगाम नहीं है।
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झज्जर में भाजपा की बैठक में हंगामा - फोटो : संवाद
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विस्तार
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लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद पहली बार पूर्व सांसद एवं भाजपा प्रत्याशी डॉ. अरविंद शर्मा कार्यकर्ताओं से मिलने पहुंचे। बैठक के दौरान एक-एक करके कई कार्यकर्ताओं ने मंच से जमकर भड़ास निकाली। अधिकतर कार्यकर्ताओं ने पूर्व सांसद एवं रोहतक लोकसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी डॉ. अरविंद शर्मा की हार का जिम्मेदार वरिष्ठ नेताओं और खास तौर पर मंडल अध्यक्षों पर फोड़ने का काम किया।

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इस दौरान आरोप लगाने पर बैठक में जमकर हंगामा हुआ और कार्यकर्ताओं के बीच बहस हुई। अन्य कार्यकर्ताओं ने दूसरे कार्यकर्ताओं को समझाने का प्रयास किया। कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट आरोप लगाए कि हार का जिम्मेदार वरिष्ठ नेता और मंडल अध्यक्ष है। उन्होंने चुनाव के दौरान गांवों में प्रचार के लिए वरिष्ठ नेता और मंडल अध्यक्षों को फोन किए, लेकिन उसके बावजूद कोई प्रचार के लिए नहीं आया। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ी है और इसका खामियाजा हार का सामना करके देखना पड़ा।
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कार्यकर्ताओं ने कहा कि पार्टी के नेता आपके साथ फोटो खींचवाने के लिए कुर्सियों पर बैठ जाते हैं, उनको नीचे उतारा जाए। कार्यकर्ताओं ने बूथ पर तैनात पोलिंग पार्टियों पर भी दूसरी पार्टी का पक्ष लेने के आरोप लगाए। साथ ही कहा कि पोलिंग पार्टियों के रूप में तैनान कर्मचारियों ने मृत लोगों के बोगस वोट तक डलवाने का काम किया। कार्यकर्ताओं के बीच बहस बढ़ती देखकर पूर्व सांसद ने खुद ही मोर्चा संभाला और मंच से कार्यकर्ताओं को शांत रहने का आह्वान किया।
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पूर्व सांसद ने सरकार के नेतृत्व पर उठाए सवाल, बोले अधिकारियों पर लगाम नहीं
बैठक में पूर्व सांसद डॉ. अरविंद शर्मा ने सरकार के नेतृत्व पर ही सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार के नेतृत्व का अधिकारियों पर कोई लगाम नहीं है। वह उनकी बात तक नहीं मानते। उन्होंने यह भी कहा कि कार्यकर्ता पार्टी की रीढ़ की हड्डी है। अधिकारी पार्टी के कार्यकर्ताओं को ही नहीं पूछते। उनके काम तक नहीं होते। यदि कार्यकर्ताओं के काम नहीं होंगे तो अगले चुनाव में इससे भी बुरा हाल होगा। उन्होंने यहां तक कहा कि कई बार तो अधिकारियों को कार्यकर्ताओं के ना करने वाले काम भी कर देने चाहिए।

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