उपमंडल की सैकड़ों एकड़ जमीन में जलभराव के चलते जहां ज्वार, बाजरा और धान की तैयार खेती डूब गई और वहीं अगली खेती की बिजाई नहीं होने का खतरा भी मंडरा गया है। जमीन पर अभी भी दो से चार फुट तक पानी भरा है जिसके निकलने की संभावना नजर नहीं आ रही है।
क्षेत्र के गांव बुपनियां, देशलपुर और शाहपुर के साथ साथ लुकसर, गंगड़वा और जरदकपुर के कुछ रकबे पर पानी भरा हुआ है। ऐसे में अगले कई माह तक पानी निकासी नहीं हो सकेगी। एक-एक किसान के 20-20 एकड़ धान और सैकड़ों एकड़ ज्वार और बाजरा खराब हो गया था और अब सरसों की बिजाई नहीं हो सकी जबकि गेहूं की तैयारियों पर खतरा बना है। देशलपुर और शाहपुर में सैकड़ों एकड़ गन्ने की फसल भी डूब गई थी। किसान दीपक, प्रदीप, सुधीर, अमित, दिलबाग, जयचंद, हेमचन्द्र का कहना है कि उन्हें जलभराव से लाखों रूपए का नुकसान हुआ है। प्रशासन की ओर से पानी निकासी का प्रबंध नहीं किया जा रहा जबकि पिछले कुछ गांवों का पानी भी उनके खेतों में छोड़ा जा रहा है। जरदकपुर, लुकसर और बुपनियां के खेतों में धान की पौध के ऊपर भी पानी ही पानी नजर आ रहा है। पानी की मार से फसल बर्बादी का दंश झेल रहे किसान एक बार फिर से अपनी फसल की बर्बादी पर आंसू बहाने को मजबूर हो गए हैं। लापरवाही विभाग की और नुकसान भुगतने पर किसान मजबूर हैं।