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किसानों ने लोहड़ी की अग्नि में जलाईं कृषि कानूनों की प्रतियां

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ढांसा बॉर्डर पर कृषि कानूनों की प्रतियां जलाकर रोष प्रकट करते किसान नेता। - फोटो : Bahadurgarh
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नए कृषि कानूनों को वापस लेने और एमएसपी के लिए कानून में स्थायी प्रावधान करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों ने बुधवार को नए कृषि कानूनों की प्रतियां फाड़ीं और उन्हें लोहड़ी की आग में जलाया। किसानों के करीब 15 किलोमीटर लंबे टीकरी बॉर्डर-बहादुरगढ़ पड़ाव में जगह-जगह लोहड़ी मनाई गई। किसानों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
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इस दौरान पंजाब, हरियाणा समेत अन्य स्थानों से आए किसानों ने सरकार के खिलाफ रोष जाहिर करते हुए सरकार से कृषि कानूनों को तुरंत निरस्त करने की मांग की। भारतीय किसान यूनियन व ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने टीकरी बॉर्डर पर धरनास्थल के निकट केंद्र सरकार के किसान विरोधी तीनों काले कानूनों और बिजली बिल-2020 की प्रतियां फाड़कर लोहड़ी की अग्नि में डालीं। भाकियू नेता पुरुषोत्तम सिंह ने कहा कि किसान इन कानूनों को कभी नहीं मानेंगे। सरकार संशोधन के नाम पर जितने मर्जी नाटक कर ले हम इन कानूनों को नहीं मानेंगे। सरकार इन कानूनों को किसानों को भले में बता रही है, लेकिन ऐसा भला करने की क्या जरूरत पड़ी जिसको किसान चाहते ही नहीं।
आंदोलन कर किसानों का टिकरी बार्डर पर पिछले 49 दिन से धरना जारी है। सरकार से कई दौर की वार्ता होने के बावजूद भी नए कृषि कानूनों को लेकर सरकार व किसानों के बीच सुलह की स्थिति नहीं बन पाई है। सर्वोच्च न्यायालय की ओर से गठित की गई कमेटी को भी किसानों ने नकार दिया है। किसान नेता बलबीर सिंह ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा के नेता इस कमेटी के समक्ष पेश नहीं होंगे। 26 जनवरी तक अपने आंदोलन के लिए पूरी रूपरेखा भी तैयार की हुई है। ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के प्रदेश सचिव जयकरण मांडोठी ने किसानों से 26 जनवरी के ट्रैक्टर रैली कार्यक्रम को सफल बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा की 26 जनवरी की इस रैली में बढ़-चढ़कर भाग लें। इन काले कानूनों को रद्द करवाने के लिए हर गांव से कम से कम 10 ट्रैक्टर और सैकड़ों किसान इस रैली में शामिल हों और आंदोलन तेज करें। इस अवसर पर रामकिशन, सीताराम अधिकारी, हरीश कुमार और कविता देवी उपस्थित थे।
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ढांसा बॉर्डर पर बैठे किसानों में सब समिति बनाने को लेकर जताया रोष
पूर्व आईजी रनबीर शर्मा, कलाकार अजय हुड और गगनदीप
बादली। ढांसा बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन में किसानों ने तीनों कानूनों की प्रतियां जलाकर रोष प्रकट किया। किसानों ने सब कमेटी में शामिल चार लोगों को भी सिरे से नकार दिया है। यहां धरना दे रहे किसानों ने संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर आगे की रणनीति को सफल बनाने पर मंथन किया। धरने प्रदर्शन की अध्यक्षता कर रहे गुलिया खाप के प्रधान विनोद बादली ने कहा कि किसानों में सरकार के प्रति रोष बना है। सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद किसानों के हौसलों में जान आई है, लेकिन कमेटी में शामिल लोगों से संगठन नाखुश है। ऐसे लोगों को कमेटी में शामिल किया गया है जो भाजपा समर्थित हैं। पहले ही तीनों कानूनों के पक्ष में रहे हैं। पूर्व आईजी रणबीर शर्मा ने कहा कि कोर्ट ने कानूनों पर रोक लगा दी है। कोर्ट का फैसला सर्वमान्य है। सरकार को भी कानूनों को निरस्त करना चाहिए। साथ ही उन्होंने बताया कि सब कमेटी के लिए किसान संगठन तैयार नहीं है, क्योंकि संगठन सिर्फ कानूनों को रद्द करना चाहते हैं। बुधवार को समर्थन देने के लिए अजय अहलावत ने भी संबोधित किया, जबकि हरियाणवीं लोक गायक अजय हुड्डा, गगनदीप ने हरियाणवी गीतों से किसानों का मनोरंजन किया। इस अवसर पर किसान नेता वीरेंद्र डागर, सरजीत जहांगीरपुर, जय प्रकाश बेनीवाल, उमराव कादयान, कपूरी सिंह, कैप्टन सतबीर गुलिया, कप्तान लाडपुर और नीरज सिलाना सहित कादियान, अहलावत, धनखड़, देशवाल, खोरड़ा सहित विभिन्न खापों और किसान संगठनों के नेताओं ने संबोधित किया।
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