बहादुरगढ़। हरियाणा संयुक्त किसान मोर्चा की आंदोलन की आगामी रणनीति को लेकर टीकरी बॉर्डर पर बैठक हुई। बैठक में हरियाणा की 14 संस्थाओं के नेताओं ने शिरकत की। इस मौके पर अन्य मांगों के अलावा संपत्ति क्षतिपूर्ति कानून को वापस लेने की मांग भी की गई।
मीटिंग के बाद किसान नेताओं ने कहा कि तीन कृषि कानून वापस लेने से किसान को कुछ भी नहीं मिला। अगर एपीएमसी को बरकरार रखते हुए तीन कृषि कानून में संशोधन किया जाता तो उसमें किसान को खुला बाजार मिलता। अपनी फसल बेचने के लिए मंडी से बाहर खरीददार मिलते और किसान को उसकी फसल का उचित भाव मिलता। आढ़तियों की लूट से छुटकारा मिलता। लेकिन सरकार ने किसानों की एक बात न सुनकर सिर्फ आढ़तियो की मांगों को पूरा किया है। जो सरकार बार-बार एमएसपी पर कमेटी बनाने की बात कर रही है, हम भारत सरकार से हरियाणा संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से मांग करते हैं कि आप कमेटी तीन कानूनों पर बनाकर उसमें संशोधन कर दीजिए, लेकिन किसानों को एमएसपी पर लाभप्रद मूल्य के साथ दाना-दाना खरीदने गारंटी कानून बनाए। जब तक किसानों की सभी मांगें सरकार पूरी नहीं करती तब तक आंदोलन चलता रहेगा। हरियाणा का किसान एक कदम भी पीछे नहीं रखेगा। बैठक में सतवीर प्रधान, डॉ. सिक्कम शौकंद, जगबीर घसोला, प्रदीप धनखड़, सुखदेव सिंह विर्क, नरेश सांगवान, विजय कुमार इमलोटा, लाभ सिंह, संदीप शास्त्री, अवतार सिंह, आत्माराम चोरड, जसबीर सिंह भट्टी, राजू बेनीवाल, दलवीर सिंह रेढू आदि शामिल थे।
हरियाणा के इन किसान नेताओं ने लागत पर लाभप्रद मूल्य के साथ दाना दाना खरीद गारंटी कानून बनाने, किसान आंदोलन के दौरान बनाए गए सभी मुकदमे वापस लेने, जिन किसानों की आंदोलन के दौरान जान गई उन्हें मुआवजे के साथ सरकारी नौकरी देने, हरियाणा सरकार द्वारा लागू किए गए भूमि अधिग्रहण कानून को वापस लेने, हरियाणा सरकार द्वारा भूमि को सरकार के अधीन करने के कानून को वापस लेने और हरियाणा सरकार द्वारा बनाए गए संपत्ति क्षति आपूर्ति रिकवरी कानून को भी वापस लेने की मांग की।