बहादुरगढ़। टीकरी बार्डर पर शनिवार को एक तरफ तो रास्ता खोलने को लेकर गतिविधियां चलती रहीं वहीं दूसरी तरफ हर रोज की तरह संयुक्त किसान मोर्चा की सभा भी अनुशासन के साथ चली। हालांकि इस सभा में कई प्रमुख वक्ताओं ने रास्ते के मुद्दे पर भी बातचीत की।
कई वक्ताओं ने कहा कि रास्ता किसानों ने बंद ही नहीं किया। हम तो दिल्ली जाने के लिए आए थे, पर सरकार ने रास्ता रोक दिया। रास्ता खोल दिया जाए और सरकार न रोके तो अब भी हम दिल्ली जाने के लिए तैयार हैं। आंदोलनकारी नेता रमेश ने कहा कि हम 11 महीने से यहां बैठे हैं। रास्ता खुलता है तो सबसे पहले दिल्ली जाने का अधिकार हमारा है। इस मामले में अंतिम निर्णय सिंघु बार्डर पर 6 नवंबर को होने वाली संयुक्त किसान मोर्चा की बैठक में लिया जाएगा।
भारतीय किसान यूनियन के नेता जसविंदर सिंह लोंगोवाल ने कहा कि किसानों द्वारा सड़कों को अवरुद्ध नहीं किया गया था। ये नाकेबंदी दिल्ली पुलिस द्वारा लगाई गई। हाल के दिनों में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को रास्ते खोलने का निर्देश दिया है, इसलिए सरकार ने रास्ते खोलने का दिखावा कर रही है।
ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन के प्रदेश सचिव जयकरण मांडोठी ने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार तीन कृषि कानूनों व बिजली के संपूर्ण निजीकरण के खिलाफ किसानों के आंदोलन की छवि को देश-दुनिया के सामने धूमिल करने से बाज आए। सरकार को संसद व सुप्रीम कोर्ट में आंदोलन की गलत तस्वीर पेश नहीं करनी चाहिए।