झज्जर। भाई को ब्लड कैंसर से जूझते हुए देखकर रितु शास्त्री ने एक-एक बूंद रक्त का महत्व समझा और उसने रक्तदान करने और लोगों को जागरुक करने का बीड़ा उठा लिया। वर्ष 2014 से लगातार रक्त दान शिविरों में अनजान, अज्ञात लोगों का जीवन बचाने के लिए रक्तदान कर रही हैं। वे अब तक 25 बार रक्तदान कर चुकी हैं जबकि हजारों लोगों को इसके लिए प्रेरित कर चुकी हैं।
पेशे से वकील रितु शास्त्री ने बताया कि उनके भाई दीपक शर्मा ब्लड कैंसर से पीड़ित थे। वह खुद अपने भाई को रक्त देती थी लेकिन हर महीने रक्त उपलब्ध होने पर परेशानी होने लगी। चूंकि तीन महीने में एक बार ही रक्तदान किया जा सकता है ऐसे में रिश्तेदारों से भी रक्त उपलब्ध होने में परेशानी होने लगी। कुछ परिचितों ने किनारा करना शुरू कर दिया लेकिन वर्ष 2016 में उनके भाई का निधन हो गया। जिसके चलते उन्हें गहरा सदमा लगा। भाई के उपचार के दौरान उसे रक्तदान की अहमियत पता चली। उसे अहसास हुआ कि रक्त की कमी से किसी की जान जा सकती है लेकिन यदि रक्तदान किसी जरूरतमंद की जान बचाई जा सकती है, तभी उसने रक्तदान के प्रति लोगों को जागरूक करने की मुहिम शुरू कर दी। रक्तदान शिविर का आयोजन कराना शुरू कर दिया। वह 25 बार रक्तदान कर चुकी हैं। रितु का कहना था कि रक्तदान से बड़ा कोई भी पुण्य नहीं होता हैं। रक्तदान महादान होता है और किसी अज्ञात अनजान व्यक्ति की यदि हम बचा सकते हैं तो इससे बड़ा सौभाग्य और क्या हो सकता है। उएडवोकेट रितु शास्त्री रक्तदाता को 26 जनवरी के पावन अवसर पर प्रशासन की ओर से प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जा चुका है। वहीं विश्व रक्तदान दिवस पर भी पिछले वर्ष जिला प्रशासन की ओर से उन्हें सम्मानित किया गया है।