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बहादुरगढ़: फर्जी दस्तावेज से बेच दी गई करोड़ की जमीन, 28 लोगों ने कराई एफआईआर

Tue, 01 Mar 2022 10:07 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, बहादुरगढ़ (हरियाणा)

सार

गांव नूना माजरा के 28 लोगों ने थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। बहादुरगढ़ के बेचिराग गांव का मामला है। जमीन 20 साल पहले बेची गई और 20 साल बाद इंतकाल दर्ज किया गया।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हरियाणा के बहादुरगढ़ के गांव नूना माजरा के 28 किसानों के साथ जमीन की धोखाधोड़ी का मामला सामने आया है। इन ग्रामीणों द्वारा बोई जा रही बेचिराग गांव खेड़का मुसलमान की करोड़ों की जमीन फर्जी दस्तावेज तैयार करके बेच दी गई। वर्ष 2001 में इस जमीन की पहली बार बिक्री दिखाई गई और 20 साल के बाद इंतकाल दर्ज किया गया। इसके बाद यह जमीन फिर से कुछ लोगों को बेच दी गई। काश्तकारों के साथ हुए धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने 28 लोगों की शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ मंगलवार को केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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नूना माजरा के काश्तकारों को अपने साध धोखाधड़ी होने की जानकारी तब मिली जब कुछ लोग जमीन को देखने के लिए घूमने लगे और कहने लगे कि यह जमीन उन्होंने खरीद ली है। कागजात चेक कराए गए तो उनके पांवों तले से जमीन खिसक गई।

गिरदावरी तोड़कर कुछ लोगों ने कस्टोडियन की इस जमीन को बेच दिया और जिस दिन दोबारा से रजिस्ट्री कराई गई, उसी दिन तत्कालीन तहसीलदार द्वारा इंतकाल दर्ज करा दिया गया। अब काश्तकारों ने इसकी शिकायत पुलिस अधीक्षक झज्जर को दी है।
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पुलिस अधीक्षक के आदेश पर अपराध जांच शाखा की जांच के बाद थाना सदर बहादुरगढ़ में एफआईआर दर्ज की गई है। नूना माजरा के 28 लोगों ने दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज कराई हैं, जिनमें 19-19 लोगों पर इस करोड़ों की जमीन की धोखाधड़ी में शामिल होने का आरोप लगा है।

फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है। इस मामले में कुछ दिनों पहले काश्तकार सुरेश जून ने भी एक एफआईआर इसी तरह खेड़का मुसलमान की कस्टोडियन की जमीन को धोखाधड़ी से बेचने के आरोप में करवाई थी।

अब धीरे-धीरे काश्तकारों को इस मामले की जानकारी मिलती जा रही है तो वे इसकी शिकायत कर रहें हैं। बताया जाता है कि कुछ माह पहले झज्जर में कस्टोडियन के रिकार्ड रूम में आग लगाने के पीछे इसी जमीन के कागजात खुर्द-बुर्द करने की मंशा हो सकती है। 

एक एफआईआर नूना माजरा निवासी बलजीत सिंह, सुलतान, सुरेंद्र, जोगिंद्र, जयप्रकाश, सुनील, भृगु, नवजीत, अप्पल, शशिलाप, सुरेंद्र, मुकेश, नंदकिशोर, पवन, पवन पुत्र सूबे सिंह, राज कुमार, अशोक, अमित, अमित पुत्र गुरूदेव, मुकेश, बीरा, सुरेश, बिशनदत, आनंद, विरेंद्र, दीपक व रामचंद्र की शिकायत पर दर्ज की गई है। दूसरी एफआईआर नूना माजरा निवासी धीरज ने दर्ज करवाई है।

पहली एफआइआर में तत्कालीन तहसीलदार कनब लाकड़ा, गिरदावर ओम प्रकाश, पटवारी मंजीत जून, पटवारी सहायक विरेंद्र सिंह, आरसी पुरुषोत्तम कौशिक, कंप्यूटर ऑपरेटर, टांडाहेड़ी निवासी पूर्ण, खेड़ी साध निवासी राजेंद्र, उत्तम नगर दिल्ली निवासी सोमबीर सांगवान, मोनिका, उर्मिला, बिमला, नरेश कुमार, संतोष, जोगेंद्र, राकेश दलाल वकील मांडोठी, राकेश नंबरदार बामनोली, रामेश्वर वकील व मंजीत जसौर खेड़ी पर धोखाधड़ी के आरोप हैं। शिकायतकर्ताओं ने कहा है कि खेड़का मुसलमान की जमीन पर वे 60-70 वर्षों से काश्तकारी कर रहे हैं।

मगर इस जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार कर राजेंद्र खेड़ी साध व पूर्ण टांडाहेड़ी के नाम वर्ष 2001 में बैनामा और 20 साल बाद इंतकाल किया गया है। वहीं धीरज ने तहसीलदार कनब लाकडा, गिरदावर सुभाष, मंजीत जून पटवारी, आरसी पुरुषोत्तम कौशिक, कंप्यूटर आपरेटर अशोक झज्जर, कंप्यूटर आपरेटर संदीप राठी, पटवारी सहायक विरेंद्र सिंह, राजेंद्र खेड़ी साध रोहतक, उर्मिला, बिमला, नरेश कुमार, संतोष, जोगेंद्र, रामेश्वर वकील, राकेश दलाल वकील मांडोठी, राहुल छिल्लर वकील, मंजीत, राकेश नंबरदार, सत्यवान आदि के खिलाफ शिकायत दी है। धीरज ने बताया कि कस्टोडियन की कुछ जमीन पर वे काश्तकारी करते थे और इस जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार करके उसे बेच दिया गया है। 

सदर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर मनोज कुमार के अनुसार, पुलिस ने इन दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एक मामला 28 लोगों की शिकायत पर और दूसरा मामला केवल एक व्यक्ति की शिकायत पर दर्ज की गई है। पूरे मामले की छानबीन की जाएगी।

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