फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आजादी के मतवाले: कैप्टन हरद्वारी ने आजाद कराई थी झांसी; रेजिमेंट, नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने बनाया था निजी ADC

Tue, 12 Aug 2025 09:58 PM IST
नवीन दलाल संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर (हरियाणा)

सार

साल 1945 में आजाद हिंद फौज ने जनरल शाहनवाज खान की अगुवाई में ब्रिटिश सेना के आगे आत्म समर्पण कर दिया था। अंग्रेजों ने आईएनए के 17 हजार सैनिकों को दिल्ली के लाल किले में बंदी बनाकर रखा।
विज्ञापन
कैप्टन हरद्वारी सिंह अहलावत - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

डीघल गांव में जन्मे कैप्टन हरद्वारी सिंह अहलावत ने आजाद हिंद फौज में रहकर देश को आजादी दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने ब्रिटिश सेना के घेरे में आई रानी झांसी रेजिमेंट को मुक्त कराने के लिए उन्हें मोर्चे पर तैनात किया था। दो मशीनगन से बारी-बारी एक ही रात में 4 हजार से अधिक गोलियां बरसाकर झांसी रेजिमेंट सकुशल मुक्त कराई थी। इस युद्ध में अंग्रेजों के करीब 300 सैनिक मारे गए थे।

विज्ञापन


अंतरराष्ट्रीय एथलीट मास्टर चांद सिंह अहलावत बताते हैं कि उनके पिता कैप्टन हरद्वारी सिंह की अगुवाई में साल 1942 में डीघल गांव के 32 सैनिकों ने आईएनए में शामिल होकर स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया था। इसमें चार सैनिक शहीद हुए और 28 सैनिक सकुशल वापस घर लौटे थे।

नेताजी ने कैप्टन हरद्वारी सिंह अहलावत को उनकी वीरता के लिए आईएनए का सर्वोच्च वीरता अवॉर्ड ‘शेर-ए-हिन्द’ देकर सम्मानित किया था। यही नहीं, उन्हें अपना पीएसओ कम एडीसी नियुक्त किया था। कैप्टन हरद्वारी बाद में नेताजी के साथ सिंगापुर, मलाया, बर्मा, सुमाट्रा, फिलिपिंस, जर्मनी, जापान आदि देशों में गए।
विज्ञापन


लेजिपोपा हिल्स को अंग्रेजों से कराया था आजाद
कैप्टन हरद्वारी अहलावत की अगुवाई में सैनिकों ने युद्ध में हिंदुस्तान और बर्मा के नजदीक लेजिपोपा हिल्स के आसपास के क्षेत्र को अंग्रेजों से आजाद कराया। इसके बाद हिंदुस्तानी और जापानी फौज की नाक में दम करने वाले 7 से 8 हजार फीट ऊंची पहाड़ी पर बनी पोस्ट चौकी पर अत्याधुनिक हथियारों से लैस 500 में से 250 अंग्रेजों को मौत के घाट उतारकर वहां भारत का झंडा फहराया था।

1945 में किया आत्मसमर्पण, 1981 में हुआ था निधन
साल 1945 में आजाद हिंद फौज ने जनरल शाहनवाज खान की अगुवाई में ब्रिटिश सेना के आगे आत्म समर्पण कर दिया था। अंग्रेजों ने आईएनए के 17 हजार सैनिकों को दिल्ली के लाल किले में बंदी बनाकर रखा। 31 दिसंबर 1945 को ब्रिटिश सरकार ने हरद्वारी सिंह अहलावत सहित सभी युद्ध बंदियों को आजाद कर दिया। इसके बाद हरद्वारी सिंह देश और समाज सेवा में जुट गए। 2 जून 1981 को उनका निधन हुआ था।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें