वर्ष 1990 में अयोध्या आंदोलन में जा रहे थे। मुकेश नाम का कार सेवक भी साथ था। उसे दूल्हा बनाकर ले जाया गया। एटा रेलवे स्टेशन पर मुकेश पानी पीने के लिए उतरा तो वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसे पकड़ लिया और पूछा- बरात कहां जा रही है।
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मुकेश ने जवाब दिया, बरात लखनऊ जा रही है। यह सुनकर पुलिसकर्मी ने उसे जोरदार थप्पड़ जड़ दिया और बोला कि इस समय तारा डूबा हुआ है। शादी का मौसम नहीं है तो बरात कहां जाएगी। यह सुनकर मैं भी ट्रेन की खिड़की के पास आया। हमारा नियम था कि कोई भी एक कार सेवक गिरफ्तार होगा तो सभी गिरफ्तारी देंगे। कुल 20 कार सेवक ट्रेन में सवार थे। यह देखकर सभी कार सेवक नीचे उतरे और गिरफ्तारी दे दी।
एटा पुलिस पकड़कर सभी को साथ ले गई, लेकिन वहां पुलिस के पास व्यवस्था सही नहीं थी तो उन्हें कानपुर जेल भेजा गया। वहां पर भी गिरफ्तारी देने वाले कार सेवकों की संख्या ज्यादा होने के कारण जेलर ने उनके साथ सभी 20 कार सेवकों को बाहर निकाल दिया। बाहर निकले तो कानपुर में गंगा पार करके उन्नाव चले गए।
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वहां भी पुलिस कार सेवकों को पकड़ रही थी। हमें लगा कि आगे जाना अब मुश्किल होगा, लेकिन वहीं से एक शवयात्रा निकल रही थी। इसी में सभी कार सेवक शामिल हो गए और आगे निकल गए। इसके बाद अयोध्या पहुंचे। -जैसा वेदांत आश्रम के अधिष्ठाता स्वामी देवेेंद्रानंद गिरि ने बताया।
अयोध्या तो मेरा घर है, आता-जाता रहता हूं
स्वामी देवेेंद्रानंद गिरि ने बताया कि अयोध्या तो मेरा घर है, आता-जाता रहता हूं...। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी मैं तीन बार अयोध्या गया हूं। अब 22 जनवरी के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का निमंत्रण मिला है। 18 जनवरी को फिर जाना है। आज मंदिर बनता देखकर बहुत खुश हूं। यह कहना है वर्ष 1987 में राम मंदिर के लिए संघर्ष शुरू करने वाले वेदांत आश्रम के अधिष्ठाता देवेंद्रानंद गिरि का। उनके नेतृत्व में बहादुरगढ़ से कारसेवकों का जत्था अयोध्या गया था। उन्होंने कहा कि अयोध्या आंदोलन में शुरू से ही जुड़ा रहा हूं। अब अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हो रहा है। राम मेरे आदर्श हैं। 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम बखूबी ढंग से होगा।