झज्जर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रेवाड़ी में 16 फरवरी को होने वाली रैली के चलते हरियाणा रोडवेज झज्जर डिपो से 150 बसें तीन अलग-अलग स्थानों पर भेजी गई। झज्जर डिपो व बहादुरगढ़ सब डिपो से 150 बसें सुबह के समय रेवाड़ी, नारनौल और कनीना भेजी गई। सुबह से ही काउंटरों पर बसों को लगाकर सवारियां भरी गई। जितनी सवारी इन रूटों पर बैठी, उसी के अनुसार बसों को रेवाड़ी, नारनौल और कनीना भेज दिया गया, लेकिन शाम होते-होते रोडवेज मुख्यालय से बसों को वापस मंगवाने के आदेश आ गए।
झज्जर डिपो की 40 बसों को नारनौल व रेवाड़ी से वापस मंगवा लिया गया। इसमें पांच बसें रेवाड़ी और 35 बसें नारनौल डिपो से वापस मंगवाई गई ताकि 16 फरवरी को यात्रियों को परेशानी न हो। बाकी 110 बसों से लोगों को 16 फरवरी को रेवाड़ी एम्स के उद्घाटन समारोह में ले जाया जाएगा। झज्जर स्थित रोडवेज डिपो में कुल 116 बसें हैं, इसमें वीरवार सुबह 85 बसें रेवाड़ी और 5 बसें नारनौल भेजी गई। बाकी 26 बसों में से 5 बसें पुलिस प्रशासन ने किसान आंदोलन के चलते पुलिस लाइन में खड़ी करवा रखी है। इसके अलावा पांच बसों को स्पेयर रखा गया है ताकि 90 बसें में से किसी बस के खराब होने पर उनका प्रयोग किया जा सके। बाकी बची 15 में से 5 बसें तकनीकी खराबी के चलते वर्कशाप में खड़ी हैं। केवल 10 बसों के सहारे ही झज्जर डिपो से यात्रियों को उनके गंतव्यों तक पहुंचाने का काम किया गया। इन 10 बसों में से भी 5 बसों के जरिये सुबह व दोपहर के समय केंद्रीय विद्यालय, केवीएस और साल्हावास माॅडल स्कूल से बच्चों को लाने व घर छोड़ने का काम किया। उसके बाद ही यह बसें रूटों पर चल सकी।
इसी प्रकार से बहादुरगढ़ सब डिपो से कुल 60 बसें रवाना की गई। इनमें से 28 बसों को कनीना और बाकी 32 बसों को नारनौल डिपो में भेजा गया। यह बसें भी 16 फरवरी को स्थानीय लोगों को लेकर रेवाड़ी जाएंगी, लेकिन शाम होते-होते रोडवेज मुख्यालय ने पत्र जारी कर कुछ बसों को वापस मंगवा लिया। बहादुरगढ़ सब डिपो से कनीना और नारनौल गई 60 बसों में से 35 बसों को वापस बुला लिया गया है जबकि रेवाड़ी डिपो गई बसों में से भी 5 बसों को वापस बुलाया गया। कुल 40 बसें डिपो में शाम को वापस बुलाया गया ताकि 16 फरवरी को नियमित रूप से बसें रूटों पर चलाई जा सके।
इन रूटों पर भेजा गया बसों को
रोडवेज की बसों को उन रूटों पर लगाया गया, जहां प्राइवेट बसें कम थी। साथ ही केवल अंतर जिला ही बसें चलाई गई। लंबे रूट पर कोई बस नहीं चलाई गई। जिन रूटों पर बसें चलाई गई, उनमें भिवानी, दादरी, रोहतक, कोसली, गुरुग्राम, बहादुरगढ़, बहुझोलरी शामिल हैं।
निजी बसें बनीं सहारा
झज्जर व बहादुरगढ़ में सरकारी बस सेवा कम होने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। लोगों को निजी बसों में सफर करना पड़ा। निजी बसों की संख्या ज्यादा होने के कारण अधिकतर रूटों पर ज्यादा समस्या नहीं आई, लेकिन जिन रूटों पर निजी बसें भी नहीं है। वहां लोगों की परेशानी बढ़ी। लोगों को एक से दो घंटे तक बसों का इंतजार करना पड़ा। जैसे ही रूटों पर निजी बसें लगती तो उसी समय फुल हो जाती। कई लोगों ने अपने निजी वाहनों से ही सफर किया।