जिले की 1130 आंगनबाड़ी व 7 मिनी आंगनबाड़ियों में वर्कर्स व हेल्पर नौनिहालों की देखरेख का जिम्मा संभाल रही हैं। इनमें करीब 12140 नौनिहालों की देखरेख करने के लिए महिला एंव बाल विकास विभाग की ओर 1130 1130 वर्कर्स व इतनी ही हेल्पर बच्चों को खेल-खेल में अक्षर ज्ञान देने के लिए लगी हुई हैं। वहीं विभाग की ओर से वर्कर्स की जिम्मेदारी को बढ़ाते हुए प्ले स्कूलों की जिम्मेदारी दी जा रही है। प्ले स्कूलों में पढ़ाने का वर्कर्स को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। जिले में सात लघु आंगनबाड़ी केंद्र चलाए जा रहे हैं, जोकि जनसंख्या के आधार पर बनाए गए हैं। लघु आंगनबाड़ी खंड मातनहेल, गांव बाजीतपुर, टप्पा बिरोहड़, डीघल में बनाए गए हैं। इन केंद्रों में औसत बच्चों की संख्या कम होने के कारण लघु आंगनबाड़ी का दर्जा मिला हुआ है।
जिले की आंगनबाड़ी में वर्कर्स व हेल्पर्स नौनिहालों और गर्भवती महिलाओं की देखरेख कर रही हैं वहीं बच्चों के टीकाकरण, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, महिलाओं को पोषण सबंधी जानकारी प्रदान करना, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देने का काम कर रही हैं।
जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में चल रही गतिविधियों को लेकर विभाग की ओर से निगरानी के लिए सीडीपीओ व सुरवाईजर की विशेषतोर से ड्यूटी लगाई गई है। आंगबाड़ी केंद्रों का निरंतर निरीक्षण करने के बाद ये अपनी रिपोर्ट विभाग के जिला मुख्यालय को भेजती हैं। पोषण माह, गोद भराई, खेल प्रतियोगिताएं व अनेक प्रकार की गतिविधियां समय-समय पर करवाई जा रही हैं।
जिले में कार्यरत सभी आंगनबाड़ी वर्कर्स व हेल्पर्स अपने कामों को अच्छे ढंग से कर रही हैं। इसके अलावा समय-समय पर सुपरवाइजर की ओर से आंगनबाडी केंद्रों का निरीक्षण करके विभाग के काम को प्रभावी ढंग से करने के लिए प्रशिक्षण व निर्देश दिए जाते रहते हैं। - नीना खत्री, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग, झज्जर।