संवाद न्यूज एजेंसी
झज्जर। केंद्र सरकार की तरफ से लागू किया हिट एंड रन कानून के खिलाफ रोडवेज कर्मचारियों ने सोमवार को विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि बहुत से चालक 10-15 हजार की प्राइवेट चालक की नौकरी करते हैं। वे 7 लाख रुपये कहां से लेकर आएगा। 10 साल के लिए अगर चालक को जेल हो गई तो उसके परिवार माता-पिता, पत्नी-बच्चों के गुजारे व खर्चे की जिम्मेदारी किसकी होगी। इसलिए इस कानून में संशोधन अत्यंत जरूरी है ।ये कानून वाहन चालकों के लिए अभिशाप है इसे तुंरत वापस लिया जाना चाहिए या इसमें संशोधन किया जाना चाहिए।
विरोध प्रदर्शन की अध्यक्षता विजय माजरा प्रधान, रामबीर फौजी और विक्रम ने की। इसका संचालन महीपाल कादियान एवं राज्य उपप्रधान प्रवीन डीघल ने किया। चालकों ने नए कानून को वाहन चालकों के लिए अभिशाप साबित बताया और मांग की कि सरकार इसे वापस ले या इसमें संशोधन किया जाए। एसकेएस से संबंधित रोडवेज यूनियन के प्रधान विजय माराज ने कहा कि हिट एंड रन कानून एक जुलाई से लागू किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने लगभग 6 महीने पहले भी इसको लागू करने की कोशिश की थी, जिसके विरोध में पूरे देश में तमाम ट्रेड यूनियन और वाहन चालकों ने विरोध प्रदर्शन किए थे। इसके अलावा भारत बंद का आह्वान भी किया गया था।
देशभर में जनता के भारी विरोध के चलते केंद्र सरकार ने इस कानून को तब लागू नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि हिट एंड रन कानून लागू होने से दुर्घटना की स्थिति में चालकों पर 7 लाख तक जुर्माना और 10 साल तक की जेल हो सकती है। ऐसे में चालकों को रोड पर गाड़ी चलाना मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि गलती चाहे किसी कि भी हो सजा और जुर्माना तो चालक को ही भुगतना पड़ेगा। अगर सरकार इस कानून को वापिस नहीं लेगी या इसमें संशोधन नहीं करेगी तो जल्द ही एक बार फिर से पूरे देश में भारी विरोध प्रदर्शन और आंदोलन किया जाएगा। इस अवसर पर अजय, नीटू, रिंकू, संदीप, विद्यानंद, नीलकंठ, अरविंद, सतबीर मौजूद रहे।