हरियाणा के मतदाता लोकसभा चुनाव में ही प्रदेश की अगली विधानसभा का स्वरूप तय कर देते हैं। जिस पार्टी या गठबंधन को लोकसभा में ज्यादा सीटें मिलती हैं, विधानसभा में उसी गठबंधन या दल की सरकार बनाते हैं।
सूबे के मतदाताओं ने 2004 के लोकसभा चुनाव में यूपीए सरकार बनवाई और हरियाणा से 9 कांग्रेस सांसद चुनकर भेजे।
नौ महीने बाद 2005 में विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ इनेलो और भाजपा की सरकार को चलता कर दिया और कांग्रेस को 67 सीटें देकर कांग्रेस की सरकार बनवा दी।
पांच साल बाद 2009 के लोकसभा चुनाव में मतदाताओं ने यूपीए-2 की सरकार में हरियाणा से फिर 9 कांग्रेस सांसद भेजे।
पांच महीने बाद अक्तूबर, 2009 में हुए विधानसभा चुनाव में हरियाणा में सबसे ज्यादा कांग्रेस के 40 विधायक जिताए और सात निर्दलीय विधायकों के साथ कांग्रेस की सरकार बन गई।
मतदाताओं ने 1999 के लोकसभा चुनाव में केंद्र में एनडीए की सरकार बनवाई और हरियाणा से इनेलो-भाजपा गठबंधन के सारे 10 उम्मीदवार जिता दिए।
नौ महीने बाद 2000 में जब विधानसभा चुनाव हुए तो इनेलो और भाजपा गठबंधन की सरकार बनवाई।
केंद्र में 1996 की सरकार को चलता करने के लिए हरियाणा में भाजपा-हविपा गठबंधन के 10 में से 7 सांसद जिताए। कांग्रेस के सिर्फ दो सांसद बने थे और एक निर्दलीय सांसद बन गया था।
जब 1996 में विधानसभा चुनाव हुए तो हरियाणा के लोगों ने भाजपा-हविपा गठबंधन के 90 में 44 विधायक जिताए। तब सूबे में हविपा-भाजपा गठबंधन की सरकार बनी थी।
1991 के लोकसभा चुनाव में हरियाणा के मतदाताओं ने सब 10 सांसद कांग्रेस के बनाए थे। उसी समय विधानसभा के चुनाव में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत देते हुए 51 विधायक बनाए थे और कांग्रेस की राज्य में सरकार बनाई थी।
विधानसभा चुनाव पहले हुए तो लोकसभा की तस्वीर झलक जाती है
1987 के विधानसभा चुनाव में इनेलो-भाजपा गठबंधन ने इतनी जोरदार जीत दर्ज की कि 90 में से कांग्रेस के सिर्फ 5 विधायक जीत पाए।
सूबे में लोकदल और भाजपा की सरकार बनी। दो साल बाद 1989 के लोकसभा चुनाव में इस गठबंधन के 6 सांसद बने। तब केंद्र में भी गैर कांग्रेसी सरकार बनी।
इसी तरह 1982 में जब विधानसभा चुनाव हुए तो कांग्रेस के सबसे ज्यादा 36 विधायक जीते और लोकदल के 31 विधायक जीते थे। तब कांग्रेस की सरकार बनी।
1984 के लोकसभा चुनाव हुए तो कांग्रेस लहर के कारण हरियाणा से कांग्रेस के सारे 10 सांसद बने थे। केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनी।
1977 के लोकसभा चुनाव में इमरजेंसी के बाद हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को एक भी सीट हरियाणा से नहीं मिली और सारी सीटें भारतीय लोकदल के पक्ष में गई थी।
जब विधानसभा चुनाव हुए तो कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया। कांग्रेस के सिर्फ 3 विधायक बने। जनता पार्टी के 75 विधायक बने थे और हरियाणा में जनता पार्टी की सरकार बनी थी।
1971 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के 7 सांसद बने थे तो 1972 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 52 विधायक बने और कांग्रेस की सरकार बनी।
1967 के लोकसभा चुनाव में 9 में से 7 सांसद कांग्रेस के बने तो 1968 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 48 विधायक बने और कांग्रेस की सरकार बनी।