हरियाणा में करोड़ों रुपए के वन घोटाले का पर्दाफाश करने वाले एक भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) अधिकारी को उत्पीड़न से बचाने के लिए सांसदों के एक समूह और एक कार्यकर्ता संगठन ने प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है।
संजीव चतुर्वेदी द्वारा सामने लाए गए इस घोटाले में हरियाणा के कई दिग्गज नेता भी फंसे हुए हैं। इसी वजह से अब उन्हें कई तरीकों से परेशान किया जा रहा है।
सांसद बासुदेव आचार्य (माकपा), प्रबोध पांडा (भाकपा), कुशल तिवारी (बसपा) और रामा देवी (भाजपा) ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर उन लोगों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है, जो अधिकारी को परेशान कर रहे हैं।
साथ ही इस मामले की सीबीआई जांच की भी मांग की है। संजीव चतुर्वेदी फिलहाल डेपुटेशन पर एम्स में चीफ विजिलेंस ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं।
चतुर्वेदी ने 2010 में वन घोटाले को उजागर कर हरियाणा में वाइल्डलाइफ सेंचुरी को खत्म होने से बचाया था।
सांसदों ने लिखा है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सरकार को पत्र लिखकर अधिकारी को न्याय दिलाने को कहा था।
मगर पसर्नल डिपार्टमेंट ने प्रधानमंत्री को गुमराह किया और इसके उलट काम किया। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया के कार्यकारी निदेशक अनुपम झा ने भी अपने पत्र में इसी तरह के अपने विचार रखे हैं।