कुश्ती को लेकर मचे बवाल के बीच खिलाड़ी भी सियासी रंग में रंगे नजर आने लगे हैं। यह खेल और खिलाड़ी दोनों के भविष्य के लिए चिंताजनक है। खेलों में सियासत ठीक नहीं है। इस समय कुश्ती में यही कुछ हो रहा है। युवाओं ने भी बात रखते हुए खेल में पक्ष-विपक्ष की राजनीति को गलत बताया है। पढ़िए शोधार्थी आरती के विचार....
खेल व्यक्ति के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। खेल क्षेत्र में खिलाड़ियों ने विश्व में अमिट छाप छोड़ी है, लेकिन कुश्ती संघ के अध्यक्ष रहे बृजभूषण शरण सिंह पर चल रहे यौन शोषण के आरोप ने खिलाड़ियों की भावनाओं को आहत किया है। महिला खिलाड़ी इस उत्पीड़न के कारण अपने आपको असुरक्षित महसूस कर रही हैं, इसलिए न्याय के लिए उन्होंने न्यायालय से गुहार लगाई है।
ओलंपिक पदक विजेता साक्षी ने अपने पदक लौटाए और पहलवानी छोड़ने तक का एलान कर दिया है। इस विवादित मुद्दे को लेकर सत्तारूढ़ व विपक्ष में खींचतान चल रही है, जबकि राष्ट्र विकास में सत्तारूढ़ व विपक्ष दोनों का ही महत्वपूर्ण स्थान है। प्रशासन ने खिलाड़ियों के हित के लिए प्रयास करने शुरू कर दिए हैं, लेकिन विपक्ष की ओर से इस मुद्दे को अपने हित के लिए प्रयोग किया जा रहा है। अतः खेल को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। हमारा लक्ष्य यह होना चाहिए कि देश में ऐसा वातावरण स्थापित हो, जिसमें महिला खिलाड़ी अपने आपको सुरक्षित महसूस कर सकें।
खिलाड़ियों को सुरक्षित वातावरण प्रदान किया जाए
वर्तमान में महिलाएं हर क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। प्राचीन समय से लेकर आधुनिक समय में महिलाओं के उत्थान के लिए भरसक प्रयास देश की महान विभूतियों की ओर से किए गए हैं, ताकि महिलाएं भी पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर राष्ट्र के विकास में योगदान दे सकें। सरकार का यह कर्तव्य है कि खिलाड़ियों को सुरक्षित व प्रगतिपूर्ण वातावरण प्रदान किया जाए। इससे खिलाड़ी अपनी क्षमताओं का पूर्ण विकास कर सकेंगे।
खिलाड़ियों के हक में हो विवादित मुद्दे का समाधान
विवादित मुद्दे पर सियासत न करके खिलाड़ियों के साथ न्याय किया जाए। राजनीति, सांविधानिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण भाग है, जो राष्ट्र के नागरिकों के लिए समानता, स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय की व्यवस्था करती है, इसलिए खेल को सियासत के कुचक्र में न फंसाकर राष्ट्र हित में योगदान देना चाहिए। विवादित मुद्दे का राष्ट्र हित और खिलाड़ियों के हक में समाधान किया जाना चाहिए। हमारा प्रयास खिलाड़ियों के लिए अच्छा वातावरण मुहैया करवाना चाहिए।
विशेषज्ञ की राय
प्रतिभागियों ने शानदार लेखनी से अपने मन की बात कागज पर उकेरी है। युवाओं ने प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। उनका यह प्रयास सराहनीय है। लेख में प्रतिभागियों ने हर पहलू को छूते हुए इसका मर्म दर्शाने का प्रयास किया है। खेलों में पक्ष-विपक्ष की राजनीति खेल और खिलाड़ी दोनों के लिए चिंताजनक है। खेलों में राजनीति गलत है। खेल साफ, स्वच्छ और पारदर्शी होने चाहिए। न्याय के लिए सर्वोच्च न्यायालय है, जहां कोई भी न्याय की गुहार लगा सकता है।
- प्रो. आरपी गर्ग, अधिष्ठाता, शैक्षणिक मामले, एमडीयू।
यह भी जानें: भारत में प्राचीन समय में कुश्ती को मल्ल-युद्ध यानी हाथों से मुकाबला के नाम से जाना जाता था। कुश्ती से जुड़ी कई कहानियां रामायण और महाभारत जैसे प्राचीन महाकाव्यों में भी मिलती हंै। कुश्ती की बढ़ती मांग काे देख वर्ष 1948 में भारतीय कुश्ती संघ की स्थापना की गई। कुश्ती में पहला पदक केडी जाधव ने 1952 में हेलसिंकी ओलंपिक में कांस्य पदक के रूप में जीता था। महिला वर्ग में पहली बार 2016 के रियो ओलंपिक में साक्षी मलिक ने कुश्ती में कांस्य जीता था।