बॉक्सिंग में सितारा बनी पिंकी जांगड़ा के सामने शुरू में चुनौतियां कम नहीं थीं। शुरूआत में पिंकी को परिवार के विरोध का सामना करना पड़ा।
लेकिन अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति के बलबूते वर्ल्ड में नंबर दो की रैंकिंग पर पहुंच चुकी है। रविवार को घर पहुंची बॉक्सर पिंकी जांगड़ा ने बताया कि उन्हें अपनी मां के लिए रोटियां बनाना पसंद है। इसके अलावा उन्हें घर के काम करना भी पसंद है।
पुरुषों का खेल कहे जाने वाले बॉक्सिंग में कुछ समय पहले तक लोग सिर्फ माइक टायसन, मोहम्मद अली, जो लुईस, रोबिंसन, जेक जोंसन और हैनरी आर्मस्ट्रॉंग जूनियर जैसे विश्वविख्यात खिलाड़ियों के नामों को ही जानते थे।
क्योंकि बॉक्सिंग के क्षेत्र में सिर्फ पुरुषों का ही दबदबा था। पिंकी जांगड़ा ने हिसार के आजाद नगर स्थित साकेत कॉलोनी में अपने अनुभव सांझा किए।
रेलवे में कार्यरत पिंकी जांगड़ा को हाल ही में इंटरनेशनल बॉक्सिंग एसोसिएशन (आईबा) की ओर से जारी की गई विश्व रैंकिंग में दूसरा स्थान मिला है।
पिंकी ने यह रैंक (45-48) किलो वर्ग में हासिल किया है। पहला स्थान फिलीपींस की जोसी गेबुको ने प्राप्त किया है। भारतीय खिलाड़ियों की रैंकिंग में पिंकी पहले स्थान पर हैं।
भारतीय खिलाड़ियों में पांच खिलाड़ियों को रैंक मिला है, जिसमें तीन महिला खिलाड़ी हैं और दो पुरुष शामिल हैं।
भाई से मिली बॉक्सिंग की प्रेरणा
पिंकी ने बताया कि बॉक्सिंग की प्रेरणा उन्हें अपने भाई अमित से मिली है। उन्होंने बताया कि उनके भाई अमित भी स्टेट लेवल पर बॉक्सिंग कंपीटीशन खेल चुके हैं।
उन्हें देखकर ही बॉक्सिंग खेलने की बात मन में आई। 2004 में उन्होंने बॉक्सिंग खेलना प्रारंभ किया। उन्होंने बॉक्सिंग की बारीकियां जानने के लिए स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) में प्रवेश ले लिया।
उनके भाई उन्हें वहां लेकर जाते थे और कोचिंग के बाद वापस घर लेकर आते थे। बॉक्सर पिंकी ने बताया कि दो साल के कड़े परिश्रम और मेहनत के बाद 2006 में पटियाला में आयोजित जूनियर नेशनल प्रतियोगिता में उन्होंने गोल्ड मेडल जीता। बस यहीं से उनका बॉक्सिंग कॅरियर शुरू हो गया।
उन्हें बॉक्सिंग फील्ड में करीब 10 साल हो गए। पिंकी ने बताया कि पांच बार की महिला बॉक्सिंग चैंपियन मैरीकॉम को हराना ही उनके कॅरियर की अभी तक सबसे बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने बताया कि 2009 में जमशेदपुर में हुए नेशनल खेलों में क्वार्टर फाइनल मुकाबले में मैरीकॉम को हराया था। वो दिन उनके जीवन का सबसे यादगार दिन है।
पिंकी जांगड़ा ने बताया कि भारतीय खिलाड़ियों के साथ खेलने के लिए कोई खास गेम प्लान नहीं बनाना पड़ता। उन्होंने बताया कि इंटरनेशनल लेवल के खिलाड़ियों से खेलने से पहले उनके बारे में जानना पड़ता है।
उनके स्टाइल और खेलने के तरीकों के बारे में जानना बेहद जरूरी होता है। अगर उस खिलाड़ी के बारे में पता होता है तो उसके खिलाफ खेलने में आसानी होती है।
मां प्रेम देवी पिंकी की इस उपलब्धि पर काफी गर्व महसूस करती हैं। उन्होंने कहा कि जब इसने खेलना शुरू किया तो तब इसके खेलने का विरोध किया गया था।
शुरू में तो इसका भाई ट्रेनिंग के लिए लेकर जाता था। फिर ये अकेले ही जाती थी और देर शाम को अंधेरे में घर आती थी तो चिंता होती थी।
लेकिन जैसे-जैसे ये अपना लक्ष्य पाती गई तो हमारी चिंता भी दूर होती चली गई। प्रेम देवी ने कहा कि पिंकी ने अपने घर, खानदान और रिश्तेदारों का नाम देश-दुनिया में रोशन किया है।
पिंकी के पिता कृष्ण कुमार डीसी कार्यालय में कानूनगो हैं। उन्हें भी अपनी बेटी की उपलब्धियों पर गर्व है। उन्होंने कहा कि हमने पिंकी को अपने बेटों की तरह ही माना है।
पिंकी ने बताया कि उनका फोकस अभी जुलाई में स्कॉटलैंड मेें आयोजित कॉमनवेेल्थ गेम्स और अगस्त में साउथ कोरिया में होने वाले एशियाड गेम्स पर है।
उन्होंने बताया कि आगरा में आयोजित ऑल इंडिया इंटर रेलवे चैंपियनशिप में (51) किलो भार वर्ग में उन्होंने वेस्टर्न रेलवे की खिलाड़ी को हराकर गोल्ड जीता है।
बॉक्सिंग के साथ पिंकी को घर के काम करना भी अच्छा लगता है। उन्हें सबसे ज्यादा रसोई में समय बिताना पसंद है। घर के लोगों को खाना बनाकर खिलाना काफी अच्छा लगता है।
ज्यादातर बाहर प्रतियोगिताओं में भाग लेने के कारण घर के कामों के लिए समय नहीं मिल पाता, लेकिन किसी टूर्नामेंट के बाद जब घर आती हूं तो घर के काम जरूर करती हूं।
उन्होंने बताया कि खाने में उन्हें खीर पहली पसंद है और सब्जियों में तरी वाली सब्जियां अच्छी लगती हैं।