सतलोक आश्रम को भले की प्रशासन ने कब्जे में ले लिया हो। पूरा देश संत रामपाल की करतूतों से हैरान हैं।
संत के अनुयायी कुछ महिलाओं को अब भी रामपाल पर वापस आने का भरोसा है। राजस्थान की महिलाओं ने अपने तथाकथित भगवान को बचाने के लिए हवन यज्ञ कराएंगी।
मेडिकल कॉलेज अग्रोहा में घायल राजस्थान के उदयपुर की रहने वाली 30 वर्षीय महिला वेदवंती ने बताया कि करीब दस वर्ष पूर्व उसने अपने मामा के घर संत रामपाल की लिखित पुस्तक पढ़ी थी।
जिससे प्रभावित होकर वह अपने पूरे परिवार सहित संत रामपाल से जुड़ गए थे। पहली बार वे करौंथा आश्रम में सत्संग में आए। बाबा के सुविचार सुने और उसी दिन से बाबा को अपना भगवान मान लिया।
उसके बाद नियमित तौर से संत रामपाल के नाम का सुमिरन करती आ रही है। वह कहती है कि खाना-पीना छोड़ सकते है, लेकिन संत का नाम नहीं भूल सकते।
गुरु के ज्ञान से उन्हें नाम की प्राप्ति हुई है। शास्त्रों में भी कहा गया है कि गुरु के बिना ज्ञान नहीं। हर इंसान को कोई न कोई गुरु जरूर है।
इसलिए उनके गुरु तो संत रामपाल ही हैं। वे अपने घर पर जाकर संत के लिए हवन यज्ञ भी करवाएंगी। संत के सभी अनुयायी बदलने वाले नहीं है।
उनके परिवार के अनेक लोगों को जेल मे डाला गया है। इस बात का उन्हें कतई दुख नहीं है। अपने गुरु के लिए वे कुछ भी कर सकते है।
उनके गुरु का आश्रम तो प्रशासन सील कर सकता है। भक्तों के मन को तो सील नहीं कर सकता है। उन्होंने कहा कि आज तक समाज में जितने भी संत हुए है।
सभी ने दुखों व संकटों का सामना करना पड़ा है। संत रामपाल की भी आज दुखों व संकटो की घड़ी है। संत रामपाल जल्द ही बाहर आएंगे। वह फिर से लोगों को दुखों को हरने के लिए प्रवचन करेंगे।