सातलोक आश्रम से पांच किलोमीटर की दूरी पर बेशक बरवाला शहर बसा हुआ था। लेकिन आश्रम में आने के बाद अनुयायी को बरवाला जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती थी।
अनुयायियों के लिए रामपाल ने हर प्रकार की सुविधा कर रखी थी। वह चाहे खाने से लेकर नहाने की हो या मेडिकल से लेकर अचानक मौत होने पर शव को जलाने की हो।
यहां तक की हजारों लोगों के रहने के लिए भी आश्रम में मुख्य हॉल बनाए गए थे। यहां नियमित रूप से रहने वाले लोगों के लिए लॉकर की व्यस्था की गई थी। इतना ही नहीं आश्रम में अनुयायियों को उनकी क्षमता के अनुरूप काम भी बांटा जाता था।
हर प्रकार की दवाइयां उपलब्ध
रामपाल के आश्रम में हजारों की संख्या में बीमारी से पीड़ित अनुयायी आते थे। ऐसे में लंबे समय से रहने वाले लोगों को भी दवाओं की समय समय पर जरूरत पड़ती थी।
यहां तक कई गंभीर बीमारियों का इलाज यहां रामपाल खुद करते थे। लेकिन आश्रम के मेडिकल सुविधाओं को देखकर नहीं लगता कि गंभीर रूप से बीमार लोगों का इलाज होता होगा। परंतु आश्रम में एक अल्ट्रासाउंड, एक एक्सरे मशीन जरूर थी।
मशीनों से बनतीं थी रोटियां
आश्रम में एक लाख से ज्यादा लोगों के रहने की व्यवस्था थी। ऐसे में आधे एकड़ से ज्यादा में आश्रम में रसोई घर बना हुआ था। जिसमें रोटियां बनाने के लिए इलेक्ट्रौनिक मशीनें लगाई गई थी।
शवों जलाने की विशेष व्यवस्था
ग्रामीणों ने बताया कि रामपाल अपने अनुयायियों को कहते थे कि मेरे अनुयायियों को मरने के बाद कहीं और जलाने की जरूरत नहीं है।
आश्रम में ही उन्हें जलाने की व्यवस्था है। आश्रम के मुख्यगेट के साथ ही बने महिला शौचालयों के साथ ही छोटा शवदाह गृह है। इस पर विशेष चिमनी लगाई गई।
मंगलवार को पुलिस और आश्रम के कमांडों के बीच जब टकराव हुआ तो इस चिमनी से बहुत ज्यादा काला , सफेद और हल्का पीला धुआं करीब 20 मिनट तक निकलता रहा।
शौचालयों व बाथरूम की संख्या हजार
आश्रम में आने वाली महिलाओं व पुरूषों के लिए शौचालयों व बाथरूम की व्यवस्था की गई थी। दो मंजिला आश्रम में बाथरूम बनाए गए थे।
एक हजार के करीब आश्रम में शौचालय व बाथरूम बनाए गए है। खास बात यह है कि सभी बाथरूम आश्रम दीवारों के साथ बनाए गए है।
आधे एकड़ में बना है पानी का टैंक
पीने के पानी के लिए आश्रम के अंदर बेहतरीन व्यवस्था की गई थी। जहां रामपाल के उसकी कोठी में आरओ की लगाए गए थे।
वहीं अनुयायियों के लिए आधे एकड़ में बेसमेंट में पानी का टैंक बनाया हुआ है। इसके अलावा पीने के पानी के लिए हजारों लीटर के प्याऊ अंदर ही बनाए हुए है, इनमें एक बार में 20 से ज्यादा लोग पानी पी सकते है।
महिलाओं के सामान रखने के लिए बना हुआ था विशेष कमरा
आश्रम के अनुयायियों को दो हिस्सों में बांटा गया था। ऐसे में पुरूषों के लिए आश्रम में खुले में ही सोने की व्यवस्था की गई थी।
इसके साथ ही रामपाल की कोठी के गेट के साथ ही विशेष महिला अनुयायियों के लिए एक बड़ा हॉल कमरा बनाया हुआ था।
जिसमें में उनके रहने व सामान रखने की व्यवस्था की गई थी। इसके अलावा महिलाओं के लिए खुले हॉल में सोने की व्यवस्था थी।
बिजली व स्कवेयरपार्ट की दुकान
आश्रम में लगे हुए बिजली उपकरणों व वाहनों के खराब होने पर ठीक करने के लिए विशेष दुकान अंदर ही बनाई हुई थी।
यहां तक अनुयायियों को मोबाइल, बैंटरी, चाबी ,नट बॉल्ट सहित कई अन्य बिजली के उपकरणों को ठीक करने का सामान रखा गया था। इस दुकान में बिजली व वाहनों को ठीक करने का लाखों रूपये सामान रखा हुआ था।
आश्रम में सैकड़ों एसी
आश्रम में बिजली की विशेष सुविधा थी। इसी के चलते सैकड़ों एसी आश्रम में लगीं थीं। आश्रम के प्रत्येक अनुयायी का विशेष ख्याल रखा जाता था। जिसके चलते अपने परिवार को छोड़कर हजारों लोग इसी आश्रम में आकर लंबें समय से रहते थे।