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पीड़िता की मां बोलीं - अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में सात छात्राओं से हो रही थी रैगिंग

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हिसार। अग्रोहा मेडिकल कॉलेज में छात्रा से रैगिंग के मामले में डायरेक्टर की तरफ से बनाई गई जांच कमेटी सोमवार को अपनी रिपोर्ट नहीं सौंप सकी। डायरेक्टर डॉ. अलका छाबड़ा का कहना है कि शिकायतकर्ता व आरोपी पक्ष दोनों को जांच के लिए बुलाया गया था, लेकिन दोनों हीं नहीं पहुंचे। उन्होंने कहा कि अब मामले में जांच पुलिस ही करेगी।
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वहीं दूसरी तरफ पीड़िता की मां ने हॉस्टल के वार्डन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी सहित सात छात्राओं से रैगिंग की जा रही थी। उनका आरोप है कि आरोपी छात्राओं ने उन छात्राओं का भी बायकॉट (बहिष्कार) करने के लिए व्हाट्सग्रुप में संदेश छोड़े हुए थे। आरोप है कि संदेश में यह भी लिखा हुआ है कि जो भी इन सात छात्राओं का बायकॉट नहीं करेगा, उसका भी बायकॉट कर दिया जाएगा। पीड़िता की मां ने बताया कि 18 अक्तूबर को सातों छात्राएं वार्डन के पास शिकायत लेकर पहुंची थीं, लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी थी।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन को सौंपे सक्रीन शॉट
पीड़िता की माता ने बताया कि उन्होंने व्हाट्सएप चैटिंग के स्क्रीन शॉट मेडिकल कॉलेज प्रशासन को सौंप दिए हैं। अगर मेडिकल कॉलेज प्रशासन या पुलिस प्रशासन उनकी सुनवाई नहीं करेगा तो वह दोनों विभाग के उच्चाधिकारियों से मुलाकात करेंगीं।
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वार्डन पर आरोप, प्रथम वर्ष में रोक लिया था नंबर
पीड़िता की मां ने बताया कि पूरे मामले में हॉस्टल के वार्डन पूरी तरह शामिल हैं। उन्होंने बताया कि हॉस्टल में चार-पांच वार्डन हैं। आरोप है कि कोई वार्डन राउंड नहीं लेता। कोई वार्डन चेक नहीं करता कि हॉस्टल में क्या चल रहा है। आरोप है कि जो भी वार्डन के पास शिकायत करता है। उस पर वहीं दबाव बना दिया जाता है। पीड़िता की माता ने बताया कि इन्हीं में से कुछ वार्डन मेडिकल कॉलेज में छात्रों को पढ़ाती भी हैं। आरोप है कि शिकायत करने पर वार्डन छात्राओं को अलग-अलग तरह की सजा देते थे। कई बार छात्राओं की हाजिरी नहीं लगाई जाती थी। पीड़िता की माता का आरोप है कि उनकी बेटी ने प्रथम वर्ष में भी वार्डन को रैगिंग मामले की शिकायत की थी, जिस पर उसका प्रथम वर्ष में रोल नंबर रोक लिया गया था। उसके बाद से पीड़िता चुप रहने लगी।
कागजों में एंटी रैगिंग कमेटी
पीड़िता की माता का आरोप है कि कॉलेज प्रशासन की तरफ से एंटी रैगिंग कमेटी गठित की हुई है। आरोप है कि एंटी रैगिंग कमेटी कभी बैठक नहीं करती। नहीं ही किसी से पूछा जाता है कि किसी को कोई समस्या है या नहीं। आरोप है कि कमेटी कागजों में है। पीड़िता की माता ने बताया कि उनकी बेटी ने प्रथम वर्ष में रैगिंग को लेकर तत्कालीन डायरेक्टर से बात की थी तो तब भी मामला दबा दिया गया था। वहीं मामले में वर्तमान डायरेक्टर डॉ. अलका छाबड़ा का कहना है कि पीड़िता स्वयं एंटी रैगिंग कमेटी की सदस्य है। उन्होंने कभी कोई शिकायत पत्र नहीं दिया। समय-समय पर एंटी रैगिंग कमेटी की बैठक होती है।
बेटी की तबीयत ठीक नहीं थी, इसलिए नहीं जा सके
पीड़िता की माता ने बताया कि उनकी बेटी की तबीयत ठीक नहीं थी। जिस कारण वह जांच कमेटी के समक्ष पेश नहीं हो सके। जांच कमेटी ने शिकायत व्हाट्सएप करने को कहा था। जो कर दी गई।
यह था मामला
उल्लेखनीय है कि अग्रोहा मेडिकल कॉलेज की एमबीबीएस की तृतीय वर्ष की एक छात्रा ने 19 अक्तूबर को जिंदल अस्पताल की छत से कूदकर आत्महत्या का प्रयास किया था। पीड़िता का आरोप था कि अग्रोहा मेडिकल कॉलेज की ही दो सीनियर छात्राएं उसकी रैगिंग करती थी। जिसकी शिकायत उसने कई बार अग्रोहा मेडिकल प्रशासन को की थी, लेकिन सुनवाई न होने पर उसने ये कदम उठाया था।
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दोनों पक्ष नहीं हुए पेश
दोनों पक्ष जांच कमेटी के समक्ष पेश नहीं हुए। जिस कारण जांच कमेटी अपनी रिपोर्ट नहीं सौंप सकी। अब मामले की जांच पुलिस कर रही है।
-डॉ. अलका छाबड़ा, डायरेक्टर, अग्रोहा मेडिकल कॉलेज।
वार्डन के बयान दर्ज करना बाकी
वार्डन के बयान दर्ज किए जाने बाकी हैं। उनके बयान दर्ज किए जाएंगे। मामले में जांच जारी है।
- सबइंस्पेक्टर अनिल, अर्बन एस्टेट थाना प्रभारी, हिसार।
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