हांसी। कस्बे के वार्ड-10 की करीब पांच हजार आबादी मूलभूत सुविधाएं न मिलने से परेशान है। वार्ड के मुख्य इलाके दिल्ली गेट, यति नगर, आमटी तालाब, पंचायती रामलीला ग्राउंड व पुराना डीएसपी कार्यालय कॉलोनी के लोग पेयजल, सफाई व्यवस्था व स्ट्रीट लाइट की हालत ठीक नहीं है। ऐतिहासिक आमटी झील के सुंदरीकरण पर 2.70 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन झील सैलानियों को आकर्षित नहीं कर पाई।
स्थानीय निवासी ओमकुमार गर्ग का कहना है कि वार्ड में लोगों के लिए बना पार्क गाय-भैंसों का तबेला बन चुका है। झील की जिन चहारदीवारियों पर फूल महकने चाहिए, जहां पर गंदगी के ढेर लगे हैं। नगर पालिका परिषद की लापरवाही की वजह से करोड़ों रुपये बर्बाद हो रहे हैं।
शिव शर्मा का कहना है कि आमटी झील को संवारने के लिए दो वर्ष पूर्व नगर परिषद ने स्वर्ण जयंती पार्क योजना के तहत 2.70 करोड़ रुपये खर्च किए थे। यहां फैंसी लाइटें, ग्रिल, पाथ वे, झूला व जिम के लिए मशीनें लगाई गई थीं, परंतु देखरेख नहीं होने से झील फिर से बदहाल हो गई।
आदित्य शर्मा का कहना है कि झील में दो तरफ इंट्री के लिए गेट बनाए गए हैं, लेकिन दोनों तरफ सीवरेज जाम है। मेन गेट के सामने महीनों से सीवरेज लाइन ही क्षतिग्रस्त है, जिस कारण गंदा पानी जमा है। सुबह-सैर पर निकलने वाले यहां की स्थिति देखकर बड़े दुखी होते हैं।
रिशु कुमार का कहना है कि सफाई व्यवस्था की हालत खराब है। सफाई के लिए कर्मचारी कभी-कभी ही नजर आते हैं। जब आते हैं तो इधर-उधर झाडू़ निकाल कर चले जाते हैं, मगर कचरा वहीं सड़क पर पड़ा रहता है।
अजय सक्सेना का कहना है कि आमटी झील के रखरखाव व सुरक्षा कर्मी तैनात करने का ठेका नगर परिषद ने दिया है, लेकिन झील में कोई सुरक्षा कर्मी व माली नजर नहीं आता। निर्माण करने वाले कंपनी पर झील के मरम्मत की जिम्मेदारी है।
आमटी झील के सुंदरीकरण के लिए राशि मेरे कार्यकाल में नहीं आई है। झील के आसपास सफाई के लिए कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। मोहल्ले की अन्य समस्याओं का भी समाधान कराया जाएगा। - मनेंद्र सिंह, ईओ, नगर परिषद , हांसी