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Hisar News: स्मार्ट बनेगा शहर, चप्पे-चप्पे पर रहेगी तीसरी आंख की नजर, आईसीसीसी प्रोजेक्ट की डीपीआर मंजूर, 150 करोड़ रुपये अनुमानित लागत

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हिसार। विकास की दौड़ में कदमताल करता शहर अब स्मार्ट बनने की पटरी पर भी बढ़ चला है। लंबे समय से प्रस्तावित इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सिस्टम (आईसीसीसी) की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को रविवार को मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने हरी झंडी दे दी। अब टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। करीब 150 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट के तहत शहर भर में 296 जगहों पर 1100 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।
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प्रदेश में फिलहाल गुरुग्राम, फरीदाबाद और करनाल में आईसीसीसी प्रोजेक्ट लागू है। फरीदाबाद और करनाल में इसे स्मार्ट सिटी मिशन के तहत लागू किया गया, जबकि गुरुग्राम ने स्वतंत्र रूप से अपनाया। नगर निगम के आयुक्त नीरज ने बताया कि रविवार को प्रोजेक्ट की डीपीआर मुख्य सचिव से समक्ष पेश की, जिस पर उन्होंने सहमति जताई। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने पर यातायात प्रबंधन और सुरक्षा के अलावा तमाम विकास कार्यों पर कैमरों के जरिये एक ही जगह से निगरानी रखी जा सकेगी। प्रोजेक्ट पर इसी साल कार्य शुरू होने की संभावना है।
क्या होता है इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर
आईसीसीसी सिस्टम सभी नागरिक सेवाओं को एक जगह पर ला देता है। इसके जरिये यह सुनिश्चित किया जाएगा कि शहर में चल रहे कार्यों की एक ही जगह से निगरानी की जा सके। इस सिस्टम की मदद से यातायात प्रबंधन, नागरिक सुविधाओं, चिकित्सकीय संसाधनों और आपराधिक वारदात की निगरानी की जा सकेगी।
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इन जगहों पर लगेंगे सीसीटीवी कैमरे
शहर में 296 जगहों पर 1100 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इनमें 85 सार्वजनिक स्थल, 12 रेलवे साइट, 16 धार्मिक स्थल, 64 स्कूल, 18 पार्किंग, 5 पार्क और 33 बाजार शामिल हैं।

प्रोजेक्ट की विशेषताएं

शहर की निगरानी-नागरिक सुरक्षा और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए शहर भर में 1100 से ज्यादा उन्नत सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जिनमें चेहरे की पहचान करने वाले कैमरे भी शामिल हैं। इस प्रणाली में एआई संचालित विश्लेषण शामिल होंगे। इनकी मदद से लावारिस वस्तुओं, घुसपैठ, संदिग्ध लोगों का पता लगाना, कैमरों की निगरानी, पेड़ों व खंभों के गिरने से संभावित खतरों की पहचान आसानी से हो सकेगी।
यातायात प्रबंधन : यातायात को सुव्यवस्थित करने के लिए शहर में 200 से अधिक स्वचालित नंबर प्लेट पहचान (एएनपीआर) और रेड-लाइट उल्लंघन जांच (आरएलवीडी) वाले कैमरे लगाए जाएंगे।
जल और सीवरेज प्रणाली निगरानी : जल संवर्धन स्टेशनों पर जल गुणवत्ता निगरानी के साथ-साथ प्रवाहमापी, दाब व ट्रांसमीटर प्रणालियों पर नजर रखी जा सकेगी। पंपों की निगरानी के लिए मध्यवर्ती पंपिंग स्टेशन और वर्षा जल प्रबंधन के लिए ऊर्जा मीटर लगाए जाएंगे।
पर्यावरण प्रबंधन : एंबिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग के जरिये शहर की वायु गुणवत्ता पर भी नजर रखी जा सकेगी। वायु प्रदूषण ज्यादा मिलता है तो तुरंत राहत के लिए कदम उठाए जा सकेंगे।
एनर्जी प्रबंधन : स्मार्ट लाइट सिस्टम के जरिये स्ट्रीट लाइट का संचालन एक ही जगह से किया जा सकेगा। इन्हें एक जगह से ऑन-ऑफ किया जा सकेगा। साथ ही कोई स्ट्रीट लाइट खराब हो जाती है तो उसका भी तुरंत पता लगाया जा सकेगा।
फीडबैक : इस सिस्टम के जरिये शहरवासियों का फीडबैक भी लिया जा सकेगा। वे अपनी शिकायतें व समस्याएं भी दर्ज करवा सकेंगे। इसमें पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम व मैसेज डिसप्ले सिस्टम का भी प्रावधान किया गया है।



आईसीसीसी प्रोजेक्ट से शहर के लोगों का काफी फायदा होगा। यह प्रोजेक्ट शहर को स्मार्ट सिटी का रूप देगा। इस प्रोजेक्ट को मंजूरी देने के लिए मुख्यमंत्री नायब सैनी व निकाय मंत्री विपुल गोयल का आभारी हूं। प्रदेश सरकार शहर के विकास में किसी तरह की कसर नहीं छोड़ रही है। आने वाले समय में कई बड़े प्रोजेक्ट आकार लेंगे। - प्रवीण पोपली, मेयर, हिसार नगर निगम
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