हिसार। प्रदेश के बजट पर अमर उजाला कार्यालय में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें सभी रिटायर्ड प्रोफेसर, किसान प्रतिनिधि, खेल प्रशिक्षक, महिला प्रतिनिधि, कर्मचारी संगठन, व्यापारी प्रतिनिधि, कृषि विशेषज्ञ, युवा वर्ग, आरडब्ल्यूए पदाधिकारी सहित अन्य वर्ग के प्रतिनिधि शामिल हुए। करीब दो घंटे चली इस गोष्ठी में सभी ने अपने विचार रखे। बजट में जिले के लिए चार्जिंग स्टेशन का एलान किया गया है। आने वाले समय में इलैक्ट्रिक वाहनों की संख्या को बढ़ावा मिलेगा।
खेल के क्षेत्र में बजट को बढ़ावा देना चाहिए था। हरियाणा में खेलों का विशेष स्थान है। खेल नर्सरी खोलने से ही काम नहीं चलेगा। इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना होगा। नेशनल, इंटरनेशनल खिलाड़ी तैयार करने वाले प्रशिक्षकों को भी बढ़ावा देने की जरूरत है। - राजेंद्र सिहाग, हॉकी प्रशिक्षक
पुरानी पेंशन योजना लागू करना, कैशलेस हेल्थ बीमा की उम्मीद थी। कर्मचारियों व सेवानिवृत्त कर्मचारियों की अनदेखी की जा रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य पर बजट अधिक होना चाहिए। पूर्व कर्मचारियों के लिए बजट पूरी तरह से निराशाजनक है। - आर्य संजय सहारण, राज्य प्रधान , हरियाणा मुख्य अध्यापक एसोसिएशन
एमकॉम, एमएससी पास युवाओं के पास भी रोजगार नहीं है। ऐसी डिग्री वाले भी ग्रुप डी के फार्म भर रहे हैं। सरकार को रोजगार के क्षेत्र में काम करने की जरूरत थी। युवाओं की उम्मीद पर यह बजट खरा नहीं उतरा। रोजगार के अलावा शिक्षा को लेकर भी काम नहीं किया गया। - रोहित कंसल, युवा
बजट में बेरोजगारी व महंगाई को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है। जिस कारण अपराध बढ़ता जा रहा है। अब सरकार की ओर से सेक्टरों में आवासीय बहुमंजिला फ्लैट की घोषणा सेक्टरवासियों के लिए अन्याय है। एन्हांसमेंट के मुद्दे को लेकर भी सरकार की ओर से काम नहीं किया गया। - सतपाल ठाकुर, प्रधान आरडब्ल्यूए , पीएलए
कॉलेज खोलने से ही काम नहीं चलेगा। प्रदेश के 46 कॉलेजों का अपना भवन नहीं है। 127 कॉलेजों में स्थायी प्राचार्य नहीं हैं। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में संख्या की बजाए गुणवत्ता पर काम करने की जरूरत है। रोजगार के अलावा युवाओं को स्वरोजगार के लिए तैयार करना होगा। बजट में कई एलान अच्छे भी हैं। - एसके मिश्रा, रिटायर्ड प्रोफेसर, राजकीय महाविद्यालय
कोरोना की विपदा झेलने के बाद चिकित्सा पर अधिक बजट देना चाहिए था। पहले स्वास्थ्य की चिंता होनी चाहिए। आयुष्मान का दायरा बढ़ाना चाहिए। जिला स्तर पर अधिक मेडिकल सुविधाएं दी जाएं। - त्रिलोक बंसल , प्रधान, एलआईसी कर्मचारी यूनियन
बजट में मार्केट फीस खत्म होने की उम्मीद थी। जिसे पूरा नहीं किया गया। सरकार को उद्यमियों को कम ब्याज पर लोन देना, प्रति किलोवाट 200 रुपये फैक्टरी से लिया जाना बंद करना, उद्योगों को बढ़ाने के लिए प्रयास करने चाहिए। जिससे प्रदेश में रोजगार को बढ़ाया जा सके। - राम अवतार गोयल, प्रधान, नई अनाज मंडी ,हिसार
विद्यार्थियों को टेबलेट, सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में पुस्तकालय, संस्कृति मॉडल स्कूलों की संख्या बढ़ाना, एनिमेशन से पढ़ाई कराना, ई स्कूल, ओलंपियाड तथा छात्रवृत्ति के फैसले अच्छे हैं। इसके अलावा 25 लाख बच्चों की हेल्थ जांच का निर्णय भी स्वागत योग्य है। शिक्षा को रोजगार से जोड़कर कौशल बढ़ाना होगा। - प्रो. रमेश आर्य, राजकीय महाविद्यालय हिसार
पंजाब के समान वेतन, कैशलेस बीमा कर्मचारियों की पुरानी मांग हैं। बजट में इनकी अनदेखी की गई है। पुलिस कर्मियों के लिए आवास की सुविधा में बढ़ोतरी की जानी चाहिए। 25 हजार पुलिस कर्मियों की भर्ती की मांग है। सेना की तरह पुलिस के लिए वन रैंक वन पेंशन हो। फैमिली पेंशनर को भी एलटीसी दी जाए। - महेंद्र सिंह स्याहड़वा, प्रधान, पुलिस संगठन
महिलाओं के लिए यह बजट पूरी तरह से निराश करने वाला है। महिला दिवस पर महिलाओं के लिए कुछ विशेष होने की उम्मीद थी। महिलाओं के लिए अच्छी शिक्षा, चिकित्सा का प्रबंध होना चाहिए। खेलों में लड़कियों को आगे बढ़ाने के लिए सुविधा बढ़ाई जानी चाहिए। - सुनीता आर्य, योग शिक्षिका
यह कोरा कागजी बजट है। किसानों की फसल पिछले तीन साल से बर्बाद हो रही हैं। किसानों को फसल का मुआवजा तक नहीं मिलता। 561 करोड़ के बजट की बात खबरों में आ रही है, लेकिन किसानों को यह मिला नहीं है। किसानों को एमएसपी नहीं मिलता। महंगे डीजल- पेट्रोल का डर सताने लगा है। - संदीप सिवाच, सचिव, पगड़ी संभाल जट्टा
बजट उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। जीएसटी के कारण खाने पीने की चीज लगातार महंगी हो रही हैं। डीजल पेट्रोल पर कुछ छूट दी जानी चाहिए थी। हमने स्टांप डयूटी पर छूट देने की मांग की थी, जिसे नहीं माना गया। व्यापार के लिए बजट प्रभावशाली नहीं है। - प्रवीण जैन , प्रधान, आरडब्लयूए सेक्टर 9-11
शिक्षा के क्षेत्र में ठेका व्यवस्था खत्म होनी चाहिए। एक्सटेंशन लेक्चरर के नाम पर 15 से 20 हजार रुपये में शिक्षकों का शोषण किया जा रहा है। 20-20 साल काम करने के बाद भी ऐसे शिक्षकों को पक्का नहीं किया जाता। बेरोजगारी व किसानों के मुद्दे पर काम करने की जरूरत थी। जिसकी कहीं न कहीं उपेक्षा हुई। - केएल रिणवा, रिटायर्ड प्रोफेसर, जाट कॉलेज