हिसार। हिसार मुख्यालय से 13 किलोमीटर दूर स्थित गांव मंगाली आज फुटबाल खिलाड़ी बेटियों के नाम से जाना जाता है। इस गांव की बेटियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल के क्षेत्र में पदक जीते हैं और अब तक 31 बेटियां खेल कोटे से सरकारी नौकरी हासिल कर चुकी हैं।
हाल ही में रेणू, काजल और आरती का नाम इस लिस्ट में शामिल हुआ है। इन तीनों बेटियों को सीआईएसएफ (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) में हेड कांस्टेबल के पद पर नौकरी मिली है। 9 सितंबर को गाजियाबाद में उन्हें ज्वाइनिंग लेटर दिया जाएगा। गांव के गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में आज भी 120 से ज्यादा बेटियां खेल में भाग ले रही हैं और देश के लिए पसीना बहा रही हैं।
हालांकि, इनके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, लेकिन इन बेटियों ने संघर्ष को अपनी ताकत बनाया और कभी हार नहीं मानी। नौकरी मिलने पर स्कूल के फिजिकल लेक्चरर सुखविंद्र कौर, अश्वनी शर्मा, नरेन्द्र कुमार, पंच सुनील मांझू, दयानंद मील, रूपेश लोढ़ा और लोकेश ने बेटियों को बधाई दी और उनकी मेहनत को सराहा।
रेणू ने छोटे भाई से प्रेरित होकर शुरू किया फुटबाल खेलना
गांव मंगाली की फुटबॉल खिलाड़ी रेणू ने 11 साल पहले अपने छोटे भाई कर्ण सिंह से प्रेरणा लेकर खेल में कदम रखा था। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीतने वाली रेणू बताती हैं, हमारा परिवार आर्थिक रूप से सामान्य था, लेकिन मेरे पिता ने कभी मुझे खेलने से मना नहीं किया। उनका समर्थन ही मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहा। आज, जब उन्हें सीआईएसएफ में हेड कांस्टेबल के पद पर नौकरी मिली है, परिवार में खुशी का माहौल है। रेणू कहती हैं कि 9 सितंबर को गाजियाबाद में ज्वाइनिंग लेटर मिलने पर एक नई शुरुआत होगी।
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बड़ी बहन से प्रेरित होकर फुटबाल में किक मारी
काजल ने 9 साल पहले फुटबाल से अपना कॅरिअर शुरू किया था। वह बताती हैं कि बड़ी बहन ज्योति से प्रेरणा लेकर मैंने मैदान में कदम रखा। अब तक काजल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक स्वर्ण और दो रजत पदक जीते हैं। काजल के पिता रामभूल, जो एक किसान हैं, उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होने के बावजूद काजल ने मैदान में कठिन संघर्ष किया। अब नौकरी मिलने का सपना भी पूरा हो चुका है, जिससे परिवार में खुशी का माहौल है।
सीनियर खिलाड़ियों को खेलते देख लगाई किक
आरती ने गांव के सरकारी स्कूल के मैदान में सीनियर खिलाड़ियों को खेलते हुए देखा और उसी प्रेरणा से फुटबाल को अपना कॅरिअर बना लिया। अब तक राष्ट्रीय स्तर पर 15 पदक जीत चुकी आरती का कहना है कि इनमें से अधिकांश स्वर्ण पदक हैं। वह बताती हैं कि आज गांव की लड़कियां खेल के दम पर न केवल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन कर रही हैं, बल्कि खेल कोटे से सरकारी नौकरी भी प्राप्त कर रही हैं। यह मेरे और मेरे परिवार के लिए गर्व की बात है।