हिसार। पंजाबी धर्मशाला, राजगुरु मार्केट में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन बुधवार को श्रीनंद नारायण धाम, श्रीधाम वृंदावन से आए कथा व्यास अरुण कृष्ण गोस्वामी ने कृष्ण-गोपी प्रेम व रुक्मिणी विवाह के प्रसंग का वर्णन किया। अरुण कृष्ण गोस्वामी ने गोपी शब्द का अर्थ बताते हुए कहा कि जो भक्ति का गोपन करके रखे, वो ही गोपी है। ऐसे भक्तों के संग भगवान स्वयं रास रचाते हैं। आत्मा व परमात्मा का मिलन ही रास है। उन्होंने कहा कि कंस अहंकार का प्रतीक है। प्रभु ने उसका वध किया। उधव ने वृंदावन में आकर जाना कि भगवान की प्राप्ति प्रेम एवं निश्छल भक्ति से होती है। कृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग का वर्णन झांकी के साथ किया गया। इस अवसर पर समाजसेवी ओमप्रकाश असीजा, तिलक राज गोस्वामी, गुलशन महाजन, जगत हिंदुजा, सतीश कुमार वासुदेवा, सतीश महाजन, सुशील राजपाल, नीरज असीजा सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
पंचमुखी दरबार आकर देख लो भक्तों पर बरस रहा बाबा का प्यार देख लो
हिसार। संकट मोचन पंचमुखी बालाजी सच्चे हृदय से प्रतिदिन आराधना करने से सभी के बिगड़े काम क्षण भर में बन जाते हैं। इसलिए हमें नित्य बालाजी भगवान की आराधना करनी चाहिए। यह बात पवन कुमार ने चौधरीवास स्थित पंचमुखी बालाजी धाम में चल रहे 12 दिवसीय रजत जयंती हनुमान जयंती विशाल मेला महोत्सव में जागरण में उपस्थित श्रद्धालुओं को कही। जागरण से पूर्व बनारस से पहुंचे ब्राह्मणों के सहयोग से सोनू भाई, मुख्य पुजारी मोनू भाई ने महाआरती की। आरती के बाद पवन कुमार भाई ने केक काटकर बालाजी का जन्मोत्सव मनाया। जागरण में बाबा का गुणगान करने विख्यात कलाकार चंडीगढ़ से कन्हैया मित्तल, खाटू धाम से प्रियंका, दिल्ली से गौरव पारिक, जयपुर से चैतन्य दाधिच पहुंचे। इस दौरान कलाकारों ने‘श्री पंचमुखी सरकार है संकटमोचन कहलाते हैं, जो काम कोई कर नहीं सकता उसे मेरे बाबा करके दिखाते हैं, ‘छम-छम नाचे देखो वीर हनुमाना’ आदि भजनों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।