डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड की तर्ज पर अब हैकर सिम स्वैपिंग के जरिए आपकी पहचान चोरी कर रहे हैं। आजकल हैकर नए तरीके अपना रहे हैं। ये गिरोह बैंक खातों से जुड़ा आपका मोबाइल नंबर बंद करवा देते हैं और फिर फर्जी पहचान पत्र के जरिए उसी मोबाइल नंबर का डुप्लीकेट सिम खुद एक्टिवेट करवा लेते हैं। दूसरा तरीका सिम स्वैपिंग के लिए हैकर अपने शिकार को फोन कर उनके सिम को अपग्रेड करने या उसकी वैधता बढ़ाने का झांसा देते हैं। इसके बाद पीड़ित से कहा जाता है कि वह सिम कार्ड पर लिखा 20 अंकों का नंबर अपने कस्टमर केयर के नंबर 121 पर एसएमएस कर दें। हैकर के पास पहले से पीड़ित का नया डुप्लीकेट 4जी या 3जी सिम रहता है। ये सिम फर्जी पहचान पत्र की मदद से प्राप्त किया गया होता है। पीड़ित जैसे ही 121 पर सिम का नंबर मैसेज करता है। कुछ देर में उसके पास मौजूद सिम बंद हो जाता है और हैकर के पास मौजूद डुप्लीकेट सिम शुरू हो जाता है। फिलहाल बड़े शहरों में इस तरह के मामले खूब आ रहे हैं। हिसार में डॉ. खन्ना से जुड़ा पहला मामला सामने आया है।
यूं करते हैं डुप्लीकेट सिम प्राप्त
साइबर क्राइम विशेषज्ञों का कहना है कि हैकर अक्सर सोशल मीडिया के जरिये आपकी जानकारी जुटाते हैं। इसके बाद उस जानकारी के आधार पर एक फर्जी पहचान पत्र तैयार किया जाता है, जिसकी मदद से डुप्लीकेट सिम जारी करा लिया जाता है। उदाहरण के लिए डॉ. नरेश खन्ना का भी इसी तरह से हैकर ने ड्राइविंग लाइसेंस तैयार करवा लिया। उस पर नाम और पता केवल आपका होता है और फोटो वह सिम लेने वाला हैकर खुद की लगा लेता है।
ये है कमजोर कड़ी यहां से उठाते हैं फायदा
सिम कार्ड देने से पहले टेलीकॉम कंपनियों के स्टोर पर आवेदक और दस्तावेज का अच्छे से मिलान नहीं किया जाता है। कई बार टेलीकॉम कंपनी के स्टोर पर कार्यरत किसी कर्मी की मदद से भी हैकरों को डुप्लीकेट सिम मिल जाता है।
ऐसे मिलता है आपके बैंक खातों की जानकारी
साइबर क्राइम विशेषज्ञों के अनुसार नोटबंदी के बाद देश में ई-पेमेंट और ई-शॉपिंग का इस्तेमाल बढ़ा है। इसके लिए बहुत से मोबाइल एप और गेटवे आदि बने हैं। जब भी हम कोई ई-पेमेंट करते हैं तो हमारी गोपनीय जानकारियां संबंधित वेबसाइट और उसके द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे गेटवे के पास पहुंच जाती हैं। ऐसे में कई जगहों से हमारी गोपनीय जानकारी हैकरों तक पहुंच सकती है। कई ऐसे भी मामले भी आ चुके हैं, जिसमें बैंक कर्मियों द्वारा अपने ग्राहकों का गोपनीय डाटा बेचा गया हो।
ये हैं सिम स्वैपिंग से बचने के तरीके
- सोशल मीडिया पर अपनी गोपनीय जानकारी या पूरा ब्योरा साझा न करें जैसे कि घर का पूरा पता।
- सोशल मीडिया संबंधी सभी सिक्योरिटी फीचर हमेशा ऑन रखें।
- सोशल मीडिया अथवा ईमेल पर अनजान लोगों द्वारा भेजा गया मैसेज या ईमेल न खोलें। इसमें वायरस हो सकता है जो आपकी सभी जानकारी हैकर तक पहुंचा सकती है।
- ई-वॉलेट में जरूरत भर सीमित रकम ही रखें।
- भरोसेमंद वेबसाइट पर ही ई-शॉपिंग करें।
- घर की महिलाओं और बुजुर्गों को भी इस संबंध में जागरूक करें।
- आधार कार्ड का नंबर अनजान मोबाइल नंबर पर एसएमएस न करें।
- धोखाधड़ी का पता चलते ही कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग आदि ब्लॉक करा दें या इंटरनेट बैंकिंग का पासवर्ड बदल दें। बैंक से की गई शिकायत का नंबर और एसएमएस सुरक्षित रखें।