हिसार। लोग कहते हैं नारी का कोई घर नहीं होता, लेकिन मैं कहती हूं नारी के बिना कोई घर नहीं होता...नारायणी वेल्फेयर सोसाइ़़टी से जुड़ीं महिलाओं ने शुक्रवार को नारी का गुणगान करतीं कविताओं के माध्यम से महिलाओं की समाज में अहमियत बताई और महिला अधिकारों की पुरजोर पैरवी की। मौका था अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में अमर उजाला के अपराजिता अभियान के तहत आयोजित विचार गोष्ठी का। महिला सशक्तीकरण एवं चुनौतियां विषय पर महिलाओं ने खुलकर अपनी बात रखी। इस दौरान महिलाओं ने केक काटकर महिला दिवस की खुशियां साझा की।
संगोष्ठी में महिलाओं ने महिला सशक्तीकरण को परिवार व समाज के लिए जरूरी बताते हुए कहा कि पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं, फिर भी समाज के अनेक तबकों में आज भी रुढिवादी सोच का बोलबाला है। महिलाओं पर कई तरह की पाबंदियां हैं। पुरुष प्रधान समाज और बेटा ही वंश आगे बढ़ाएगा, जैसी सोच से छुटकारा नहीं मिल सका है। जब तक महिला हिंसा का ठोस उपाय नहीं निकलेगा, तब तक सशक्तीकरण का सपना अधूरा है। अनेक महिलाओं ने कविताओं के माध्यम से महिला की महिमा और समाज में बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। सभी ने एकस्वर में कहा कि महिलाओं को सशक्त बनने के लिए खुद ही शुरुआत करनी होगी। बेटियों को आगे बढ़ाना होगा, महिलाओं को फैसला लेने का अधिकार देना होगा। मोनिका वर्मा ने मैं स्त्री हूं मैं नारी हूं मैं कली हूं, मैं ही फुलवारी हूं.... कविता के माध्यम से अपने भावनाएं व्यक्त कीं। प्रतिभा, एकता, नीलम, मनेश, एकता चावला, गीता, स्नेहलता, शैली, मिताली, नेहा, नीलम गोयल और अनीता जैन भी कविताओं के माध्यम से अपने विचार रखे। अंशुला, सीमा, निलेश, रजनी, रीतु, श्वेता, रीतिका, मिनाक्षी, संगीता, शालू, पुष्पा, अनिता, श्रेया व संगीता गोयल उपस्थित रहीं।
महिलाएं शुरू से ही सशक्त रही हैं
महिलाएं शुरू से ही सशक्त रही हैं, ये सोचने का नजरिया है। जैसे विद्या सरस्वती मां के पास, धन लक्ष्मी मां के पास और अस्त्र-शस्त्र व बल दुर्गा मां के पास है। जरूरत है बस समझने की। महिलाएं खुद मानने को तैयार नहीं हैं कि वे सशक्त हैं, बल्कि वे खुद दूसरों पर निर्भर रहती हैं। हमें इस सोच को बदलना होगा। - डॉ. गुंजन गोयल, प्रधान, नारायणी वेलफेयर सोसाइटी।
सशक्तीकरण आज भी केवल कागजों में
वैदिक काल में नारियों को पूजा जाता था, लेकिन आज के समय में उतनी इज्जत नहीं मिल रही है। सशक्तीकरण आज भी केवल कागजों में है। आज भी अनेक तबकों में लड़कियों को कॉलेज-स्कूल नहीं भेजा जा रहा। यहां तक की सामान लाने के लिए भी लड़कियों को घर से बाहर नहीं जाने देते। सशक्तीकरण तो है, लेकिन उतना नहीं है, जितना होना चाहिए। - कविता, शिक्षिका
महिलाओं की सुरक्षा के लिए सख्त कानून बने
महिलाओं की सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनने चाहिए। घर से बाहर आज भी लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं। सक्षम बनने के लिए लड़कियों को और ज्यादा शिक्षित करना होगा। उन्हें सेल्फ डिफेंस का प्रशिक्षण देना होगा। लड़कों को भी समझाना चाहिए कि वे महिलाओं व लड़कियों की इज्जत करें। उन्हें परिवार से ही संस्कार देने चाहिए। - कीर्ति गोयल, उप प्रधान नारायणी वेलफेयर सोसाइटी
महिलाओं को अपने हक के लिए खुद से लड़ना होगा
महिला सशक्तिकरण के लिए पहले महिलाओं को अपने हक के लिए खुद से लड़ना होगा ताकी बाद में दुनिया से लड़ने के लिए मजबूत हो सकें। हमें बेटियों को आगे बढ़ने का मौका देने चाहिए। खुद ही कदम नहीं उठाएंगे तो समानता का अधिकार नहीं मिल पाएगा। - कृतिका भुटानी
महिला व पुरुष दोनों अपनी जिम्मेदारी समझे
महिला व पुरुषों के विचार नहीं मिलते तो दोनों खुद को एक दूसरे से बेहतर समझने लग जाते हैं। इससे दोनों में अहम की भावना आ जाती है। महिला व पुरुष दोनों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। महिला सशक्तीकरण तभी हो सकता है जब दोनों अपने-अपने काम को समझकर एक दूसरे को आगे बढ़ने का मौका देंगे।- सुमन शर्मा
महिला का सम्मान होगा तभी महिला सशक्तीकरण संभव
महिला तू मेरी बेटी है पर मेरी परछाई मत बनना, तू सक्षम है अपनी राह खुद चुनना...एक औरत बेटी, मां और हर रिश्ते से पहले वह एक महिला है और महिला का सम्मान करना चाहिए। तभी महिला सशक्तीकरण संभव हो पाएगा। - डिंपल