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Hisar News: कल से दीपोत्सव के साथ शुरू होगी दीयों की ब्रिकी, कारीगरों ने तैयार किए रंग-बिरंगे और डिजाइनर दीये

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 धोला कुआं के समीप अपने मकान में दीयों को रंग रोगन कर अंतिम रूप देती हुई मां बेटी।
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हांसी। कल से पंच दीपोत्सव की शुरूआत हो रही है। धनतेरस से लेकर भैया दूज तक विभिन्न तरह की पूजा-अर्चना में मिट्टी से बने दीयों की जरूरत होगी। वहीं त्योहार पर कारीगरों ने मिट्टी के रंग-बिरंगे और डिजाइनर दीये तैयार किए हैं। आज से बाजारों में जगह-जगह पर दीये बिकने शुरू हो जाएंगे। इस बार बाजार में 8 से 10 लाख दीये बिकने की संभावना कारीगरों ने जताई है।
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इस बार हांसी में बड़े पैमाने पर मिट्टी के दीये तैयार किए जा रहे हैं। दीये बनाने वाले कारीगरों के अनुसार करीब 8 से 10 लाख दीये तैयार किए गए हैं। वहीं रंग-बिरंगे दीयों की मांग अधिक है। इसके लिए कारीगर बीते एक महीने से पूरे परिवार के साथ तैयारी कर रहे हैं। दीयों के साथ भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की प्रतिमाएं बाजारों में जगह-जगह स्टॉल पर देखने को मिलेंगी। वहीं कारीगरों को इस बार दीये बनाने के लिए मिट्टी की समस्या का भी सामना करना पड़ा। यहां पर ज्यादातर काली मिट्टी का उपयोग दीये बनाने के लिए किया जाता है। कारीगरों को कहना है कि इस बार अलग-अलग शहरों से मिट्टी मंगवानी पड़ी और इस बार मिट्टी महंगी भी मिली। वहीं पिछले कुछ सालों से लोग स्वदेशी चीजों को अपनाकर त्योहार मना रहे हैं। ऐसे में इस बार कारीगरों को पहले से भी ज्यादा दीये बिकने की उम्मीद है।


करवा चौथ से शुरू हो जाता है कारोबार
मिट्टी का काम करने वालों का कारोबार करवाचौथ से शुरू हो जाता है। मिट्टी से बने करवे की मांग करवाचौथ पर रहती है। फिर अहोई अष्टमी पर भी मिट्टी से बने लोटे की मांग रहती है। दीपावली के लिए दीये व अन्य सामान की मांग रहती है। इसके बाद कार्तिक महीने के आखिरी पांच दिनों में भी दीपदान के दौरान दीयों की खासी बिक्री होती है।
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हम मिट्टी से चीजें बनाने का कारोबार पुश्तैनी कर रहे हैं। अब फैंसी चीजों का जमाना आ गया है। मिट्टी के दीये या फिर अन्य वस्तुएं भी फैंसी बनाकर बेच कर रहे हैं। एक महीने से पूरा परिवार तैयारी में लगा हुआ है। हमने करीब 30 हजार दीये तैयार किए हैं। इसके अलावा बड़े दीये, भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की प्रतिमा भी तैयार की हैं। लेकिन अब मिट्टी महंगी हो गई है और मिल भी नहीं रही इसके चलते ज्यादा काम नहीं कर पाए। - रमेश कुम्हार



पहले के मुकाबले दीयों की बिक्री बढ़ी है। पहले जहां 50 पैसे प्रति दीया बिकता था। वहीं अब एक रुपए प्रति दीया बिक रहा है। अब मिट्टी का भी रेट बढ़ गया है। अब 3000 रुपये क्विंटल मिट्टी मिल रही है। मिट्टी महंगी होने के कारण दूर-दराज से मंगवानी पड़ रही है। इसमें काफी समस्या आ रही है। बाकी त्योहार को लेकर अच्छी बिक्री होने की उम्मीद है। -
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अमर सिंह
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